टीचर जी

प्रेषक : राजेश

दोस्तों मेरा नाम विजय है। मेरी उम्र 22 साल की है और में बहुत अच्छा लगता हूँ। में आज आप सभी को अपनी लाईफ की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। दोस्तों इसमे मुझसे कोई गलती हुई हो तो प्लीज मुझे माफ़ करे, दोस्तों ये कहानी अभी कुछ समय पुरानी है। दोस्तों किसी कुंवारी चूत का भोग कितना मुश्किल है। ये बात आप मेरी इस कहानी को पढ़ने के बाद शायद समझ जाए।

बात उन दिनो की है जब में ट्यूशन पढाता था। मेरी स्टूडेंट रंजना जो 18 की हो चुकी थी और 32 की ब्रा 26 जीन्स की कसावट उसे जवान होने का अहसास करवा चुकी थी। फिर भी वो बच्ची बने रहने की हसरत मेरे 27 साल के 7 इंच के लंड को हर दिन कसरत करवा देती थी। में उसे दो महीनों से पढ़ा रहा था और पहले ही दिन से उसके लंबे बालों, स्पॉटलेस गालों, लगभग मिल्की फेस मे बड़ी बड़ी काली आँखों का कायल हो चुका था। ट्यूशन के दौरान मैने उसकी कई फोटो मोबाइल पर खींची जिन्हे देखकर कितनी बार पता नहीं उसके नाम से हस्तमैथुन कर चुका था। मुझे जब भी मौका मिलता डाटने या शाबाशी देने के बहाने उसके पीठ, बूब्स या जहाँ पोसिबल हो हाथ ज़रूर लगाता था। जब मुझे चिड़ाते हुए पेन चबाती बेसूध रहती, तो टॉप मे उसकी कसी चूची देखकर में थूक का घूँट पीता, मेरे पास कोई और रास्ता भी नहीं था।

में उसके घर पर हर शाम को जाता था। एक दिन जब में वहाँ पहुंचा तो उसने मेरे पाँव छुए और बताया की वो क्लास मे फर्स्ट आई है, तभी मैने उसे बाँहो से पकड़ के उठाया, मेरी हथेली उसके कोमल बाँहो को पकड़े हुए थी। मैने वाह वाह कहते थोड़ी हिम्मत करते हुए उसे अपनी और थोड़ा खींचा और उसके माथे को चूम लिया, उसके माथे पर बालो को चूमकर मुझे मादकता की फीलिंग हुई लेकिन खुद को रोक लिया।

अब मैने उसके रिएक्श को देखना चाहा फिर वो थोड़ी सी हड़बड़ा सी गई, तभी मेरी गांड फट गई, मैने अपनी भावना को स्थिर बनाया कहा कि तुमने मेरा सर फक्र से उँचा कर दिया और उसे अपने साथ आने का इशारा कर उसकी माँ की और चल दिया जो किचन मे थी।

तभी मैने उसकी माँ के सामने उसकी जमकर उसकी बड़ाई की अब वो शरमा के नीचे देख रही थी। अब मेरी जान मे जान आई उसकी माँ ने उसे मिठाई के लिए कहा वो फ्रीज़ की और गई तब तक में बिना रुके उसकी बड़ाई करता रहा, फिर मिठाई खाकर हम पढ़ने बैठ गये। इस दौरान मुझे डर था कि कहीं वो मेरे जाने के बाद घर मे चूमने की बात ना बताए सो बाहर निकलते हुए अंत मे मैने उससे कहा ‘रंजना मैने तुम्हे चूमा तो तुम डर गई वो कुछ नहीं बोली, मैने कहा कि तुमने आज मेरा सर उँचा कर दिया इसलिए में खुशी मे रुक नहीं पाया।

अब बड़ाई से वो फिर मुस्कुराई मैने उसके सर पर फिर हाथ फैरा और उसे बोला शाबाश और फिर घर पर निकल गया, फिर अगले दिन सभी चीज़े नॉर्मल रही और मेरा डर दूर हो गया। ये था मेरा पहला कदम अब जब में उसे पढाते वक़्त छूता तो उसके शरीर मे एक अकड़न आती थी, जिससे यह साफ था कि वो मेरी हरकतो को नये ढंग से फील कर रही थी। तभी कुछ दीनो के बाद मैने उसे रिज़ल्ट के लिए एक मोबाइल फोन गिफ्ट किया, फिर दूसरे दिन पढ़ाई के बाद मैने उसका मोबाइल नंबर माँगा और कभी कभी अच्छे अच्छे मैसेज करता लेकिन कॉल नहीं किया और कभी दोहरे मतलब वेल हल्के सेक्सी मैसेज भी करता दीपावली की शाम को उसका पहला कॉल आया, उसने मुझे विश किया मैने उसे बधाईयां दी और फोन पर ही कहा ‘प्यारी रंजू अगर में वहाँ पर होता तो तुम्हे सर चूम कर हेप्पी दीपावली कहता, लेकिन अब उधर से फोन खामोश हो गया।

मैने फिर फोन पर ही किस किया और कहा गिफ्ट मिल गया ना, उधर से कोई आवाज़ नहीं आई, मुझे डर भी लग रहा था और लंड पूरे उफान पर था। फिर उसने फोन काट दिया मैने रात को दो बजे उसे कॉल किया वो सोई थी पर फोन पर जवाब सही ढंग से ही मिला, मैने कहा कि मेरे विश करने के तरीके से वो नाराज़ तो नहीं तो उसने कहा कि नहीं, फिर मेरी हिम्मत बढ़ी मैने उसके जिस्म की बड़ाई की और कहा कि उसकी तरह ब्यूटिफुल, कमसिन, नाज़ुक, लड़की मैने आज तक नहीं देखी, वो बोल नहीं रही थी लेकिन फोन भी नहीं काटा मुझे लगा कि उसे अच्छा लग रहा है।

फिर मैने आगे बढ़ते हुए उसके शरीर के हर अंग की तारीफ की, पहले फेस, आई, ईयर नाक आदी। फिर कमर फिर जाँघ और फिर मस्त चूची, चूतड़ और कहा कि तुम्हारी पुसी को मैने देखा ही नहीं इसलिए क्या बताऊँ, उसकी साँसे तेज हो रही थी, मैने फोन पर ही चोदने की थीम चालू की, मैने कहा कि हम एक साथ तुम्हारे बेड पर हैं, अब में तुम्हे ज़ोर से चूम रहा हूँ, तो उधर से हल्की मादक आवाज़ आने लगी में समझ गया कि उसने उंगली चूत मे डाल रखी है। उसकी आवाज़ बढ़ती गई फिर यह तेज सांसो के साथ ख़त्म हो गई। मैने उसे फोन पर कई बार किस किया और गुड नाईट कहा, फिर उसने जवाब मे गुड नाईट ज़रुर कहा था।

अगले दिन में जब उसके घर गया तो थोड़ा डरा था पर वो दरवाजे पर ही दिखाई दी, में जैसे ही पहुंचा उसने मुझे दीपावली विश की में मुस्कुराया और अंदर गया, वहाँ उसकी माँ ने मुझे थोड़े पकवान खिलाए फिर मे रंजना के रूम मे चला गया जहाँ पर वो पढ़ती थी। में परदा हटाकर अंदर गया वो बेड पर बैठी हुई थी और पन्ने पलट रही थी। में गया तो वो उठी और अपनी टेबल से बुक लेने लगी।

ओरेंज सूट मे वो कयामत लग रही थी, कूल्हे पूरी तरह बाहर निकले, साइड से बूब्स की नक्काशी दिख रही थी। मेरा लंड सबसबा उठा, दिल की धड़कन तेज हो गई और में उसके पीछे खड़ा हो गया वो मुड़ी नहीं बल्कि बुक ही देख रही थी। मैने उसके पीठ पर हाथ रखा पीछे की पीठ काफ़ी खुली थी और उसकी चोटी उसे ढकी हुए थी। मैने चोटी को हटाया और उसकी पीठ को चूम लिया वो सिहर गयी किसी लड़के के शरीर से संपर्क का यह उसका पहला अहसास था। फिर मैने उसे मोड़ा और चेहरा अपने सामने किया उसकी नज़रे दरवाजे की और थी शायद उसे अपनी माँ का डर हो।

मैने दोनों हाथों से उसके चेहरे पर आते बालो को हटाया, फिर हाथ उसके सर के पीछे ले जाकर उसके चेहरे को अपनी और खींचा तो वो थोड़ा मना करने लगी लेकिन में माना नहीं और अपने होंठ उसके होठों पर चिपका दिए। उसने हटने की कोशिश की पर में दबाए रखा उसने ज़्यादा ताक़त लगाई, तभी मैने छोड़ दिया वो पीछे हटकर अपना मुँह पोछने लगी। आज पढ़ने मे हम दोनों का ध्यान नहीं था, में बार बार कमरे के बाहर देखता और वो किताब से नज़र नहीं हटा रही थी।

वापस जाने का समय हुआ तो में उसे गौर से देखने लगा और देखता रहा वो बार बार नज़र झुका रही थी फिर में उठ गया और उसे उठने को कहा, मैने उसे अपनी और खींचा और कस के जकड़ लिया फिर अपने होठ उसके होठ पर जड़ कर जीभ से उसके अंदर रास्ता निकालने लगा। जब एक हाथ से मैने उसके चूचीयों को सहलाना शुरू किया तो उसने मुहं का रास्ता खोल दिया, मैने पूरी जीभ उसके मुहं मे डाल दी और रस का आनंद लेने लगा, फिर उसने भी अपनी जीभ हिलानी शुरू की हम दोनों को मज़ा आ रहा था। अब मैनें अपने हाथों को उसके टॉप के अंदर डाल दिया और ब्रा के अंदर सारी उंगलियों को डालकर उसकी चूची को दबाने लगा, उसकी चूची मुलायम और निप्पल सख़्त थे।

मैने जब ज़ोर से दबाया तब उसके सख़्त होने का पता चला, चूची दबाने और स्मूच करने से उसकी आँखे अब बंद हो रही थी, मैने अपनी बाएँ हाथ से उसकी जीन्स के बटन को अनलॉक किया और हाथ उसकी पेंटी के अंदर डालते हुए अंदर चला गया, उसकी चूत के बाल घने थे, उसकी जांघे गीली हो चुकी थी शायद वो पहले ही झड़ गई हो लेकिन मैने अपनी उंगली उसकी चूत के मुहं पर रखकर रगड़नी शुरू की। एक हाथ से में बूब्स दबा रहा था, मुहं को इतनी ज़ोर से चूमा था की लगभग साँसे रुक गई थी और उंगली को चूत पर रग़ड रहा था।

यह त्रिलोकिक सुख अदभुत था, अब उसने अजीब सी आवाज़ निकालनी शुरू की जैसे कराह रही हो पर वो मादकभरी आवाज़ का चरम था, मुझे लगा कि उसकी माँ सुन ना ले सो मैने और ज़ोर से उसके मुँह पर अपने मुँह को टाईट कर दिया और जीभ को मुहं मे डाल दिया फिर पूरी ताक़त से बूब्स दबाते हुए अपनी उंगलियों को तेज़ी से उसकी चूत के थोड़ी अंदर रगड़ने लगा वो ‘आनन्नह आआह्ह्ह की आवाज़ निकालती रही पर में रुका नहीं उंगलियों को और तेज और सख़्त कर रगड़ने लगा

वो मेरे बालो को पकड़ मुझे खींचने लगी मेरी गर्दन पर नाख़ून खुरचने लगी। मैने थोड़ी उंगली अंदर डाली, उसकी चूत बिल्कुल गर्म थी। उसे थोड़ा दर्द भी हुआ, वो धीरे धीरे निढाल होने लगी तेज सांसो के साथ मुझ पर झूलने लगी और मैने फील किया कि मेरी उंगलियाँ गीली होने लगी, उसके अंदर से पानी निकल रहा था, में भी अपने को रोक नहीं पाया और फिर मेरे लंड ने भी वीर्य छोड़ दिया, मैने उंगलियों को बाहर निकाल वो मेरे ऊपर ही थी। मैने उसके माथे को चूमा और फिर उसके सामने अपनी उंगलियों को मुँह मे ले गया, उसके वीर्य को अपनी जीभ से सफ़र किया वो दंग थी, मैने उसे कुर्सी पर बैठाया बालों पर हाथ फैरा और बाहर निकल आया। अब दूसरे दिन फिर से अपने समय पर उसके घर पर पहुंच गया लेकिन आज मुझे वो कुछ बदली हुई सी लग रही थी। वो मुझे देखकर अपने रूम मे उठकर चली आई थी। तभी अंदर आते ही उसने मुझसे कहा कि क्या सर आपको तो किसी ने अच्छे से चोदना भी नहीं सिखाया और अब वो मेरे बहुत करीब आकर बैठ गई। वो आप मेरे लंड को अपने हाथ से सहलाने लगी। अब ऐसा करने से मेरा लंड दोबारा खड़ा हो गया और पेंट के ऊपर से साफ नज़र आने लगा।

रंजना ने जब मेरे लंड को देखा तो फौरन मुझसे पूछा कि सर मुझे एक बात बताइये आपका लंड इतना छोटा क्यों है? उसके इस सवाल से में एकदम चौक गया और बैठ गया। में बिल्कुल सटपटा गया। में क्या बोलूं, वो तो तुम हाथ से नहीं चूत तभी वो बोली शरमाओ नहीं में आपकी स्टूडेंट हूँ। मुझसे क्या छुपाना, तभी मैने उसको दबी आवाज़ में जवाब दिया कि वो असल में मुझे तुम बहुत पसंद हो और जब भी में तुम्हे देखता हूँ मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

अब उसने कहा ओफ्फो अगर यह बात थी तो मुझे पहले बताना था ना और यह कह कर वो मुझ पर इस तरह गले लगी कि उसके बूब्स मेरी छाती से चिपक गये, उसकी गांड मेरे दोनों हाथों के ऊपर इस तरह टिकी हुई थी कि मेरा लंड उसकी चूत को छूने को तैयार लग रहा था। वो अब उसने अपने होठ मेरे होठ पर रखे और मुझे किस करने लगी। उसने मेरे मुहं मे अपनी पूरी जीभ घुसा दी, जिससे मुझ में एक अजीब सी मस्ती छा गयी। थोड़ी देर तक वो ऐसे ही किस करती रही फिर उसने मुझसे पूछा कि मज़ा आ रहा है।

मैने कहा बहुत अब वो जोर जोर से अपनी गांड हिलाने लगी जिससे मेरा मज़ा और दुगना हो जाता दस मिनट ऐसा करते हुए मुझे महसूस हो गया कि अब में झड़ चुका हूँ, उसने मुझे छोड़ दिया और वो मेरे पास ही बैठ गई अब थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहने के बाद उसने मुझसे कहा कि सर आपका जब भी दिल करे जहाँ मर्ज़ी हाथ लगा लो में आपसे कुछ नहीं कहूँगी। तभी मेरी नज़र फिर उस पर पड़ी अब मैने देखा कि उसने ब्लेक रंग का सूट पहना था जिसमें उसके चूतड़ो का उभार साफ ज़ाहिर हो रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और अब मैने बिलकुल पास आकर अपने लंड को उसके चूतड़ो पर चिपका दिया और वो एकदम चोंक गई और बोली अरे सर आप मैने उसे खींच कर अपनी छाती पर बैठाया कि रंजना मेरे और करीब आई।

फिर मेरे दीमाग़ में एक शैतानी ख्याल आया मैने अपना हाथ रंजना की चूतड़ों पर रख दिया और सहलाने लगा और उससे कहा कि रंजना क्या तुम मेरी गोद में बैठ सकती हो, तभी उसने मुझे देखा और मुस्करा दी कहा क्यों? तभी मैने कहा कि आज मेरे लंड के साथ में तेरी चूतड़ों की प्यास भी बुझाना चाहता हूँ। जिसके लिए मेरा लंड कब से तडप रहा है उसने ठीक है कहा और मेरे ऊपर बैठ गई तभी मैने कहा जान अब तुम जरा अपने चूतड़ को थोड़ा अपने हाथों से फैला दो, मेरे हाथ ज़रा बिज़ी रहेंगे उसने मुझे देखा और मुस्कुराई और कहा ठीक है।

फिर यह कर मैने अपने दोनों हाथ उसके बूब्स पर रख दीए और उनको सहलाने लगा और थोड़ी थोड़ी देर में अपने लंड से उसकी गांड पर झटके देने लगा। अब वो भी कभी कभी अपनी गांड को आगे करती तो कभी पीछे, अब उसके जिस्म से इतना चिपका होने की वजह से मुझे उसके बदन की मीठी मीठी खुश्बू आ रही थी, जो मुझे दीवाना बना रही थी और ज़ाहिर है उसको भी मज़ा आ रहा था क्योंकि हर थोड़ी थोड़ी देर में मुझे उसकी सिसकियाँ लेने की आवाज़ सुनाई दे रही थी। हम लोग सेक्सी सेक्सी बाते भी कर रहे थे।

फिर वो पूछे जा रही थी कि मुझे उसके बदन की कौन कौन सी चीजे अच्छी लगती हैं और क्यों इन सब बातों और हरकतों ने हम दोनों को बहुत गरम कर दिया था। तभी उसने मुझसे कहा कि जब तुम मुझे ब्रा में देख रहे हो तो मेरा भी दिल चाह रहा है कि तुम भी अपने पूरे कपड़े उतार दो, फिर मैने भी खुशी खुशी अपनी पेंट और शर्ट उतार कर फेंक दी और उससे चिपक कर लेट गया।

मेरी आज बरसो की प्यास पूरी होने जा रही थी और तभी मैने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रखा और उन्हें दबाने लगा और दूसरा हाथ उसकी चूत पर रखा और सहलाने लगा और लंड को उसके चूतड़ों के दरम्यान ऐसा फँसा लिया कि मेरा लंड ठीक उसकी गांड के सुराख को छू रहा था और मुहं से उसकी गर्दन और कंधों को चाटने लगा। अब यूँ कहिये कि मेरे जिस्म का हर एक हिस्सा रंजना के खूबसूरत बदन को मसल रहा था। अब रंजना भी बहुत मस्त हो गई और बार बार अहह एहह जैसी आवाज़ें निकाल रही थी।

अब उसकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसने मुझसे कहा जानू प्लीज़ मेरी चूत को भी ज़रा चाट लो और यह कह कर वो सीधी लेट गई और तभी मैने अपना मुहं उसकी चूत पर रख दिया और उसकी रसीली चूत को बुरी तरह चाटने लगा, जैसे की में सदीयों का प्यासा हूँ। फिर में अपनी जुबान उसकी गीली चूत के हर एक एक हिस्से पर फैर रहा था, उसकी चूत की महक मुझे अपने मुहं को उसकी चूत पर और दबाने पर मजबूर कर रही थी, अब वो बार बार कह रही थी कि आज पूरा मुहं घुसा दो मेरी चूत में सर और में दीवानो की तरह उसकी चूत चाटे जा रहा था।

में आधे घंटे तक यही करता रहा उसके बाद मैने कहा जान प्लीज़ क्या तुम मेरे लंड को चुस लो बेचारा कब से तरस रहा है, तभी उसने कहा ठीक है, अब में उल्टा हो गया और हम लोग 69 पोज़िशन में लेट गये थे। वो भी मेरे लंड को पागलों की तरह चूसने लगी और में भी उसकी चूत को बिना रुके चाट रहा था और ऐसे ही हम दोनों झड़ गये उसने मेरे लंड का पूरा पानी पी लिया और मैने उसकी चूत का पी लिया। आप सोच सकते होंगे कि मुझे कितना मज़ा आ रहा था उसके बाद हम दोनों सीधे हुए और एक दूसरे से चिपक कर गले लगे।

दोस्तों उस दिन के बाद मैने हर एक दिन उसकी पढ़ाई के बहाने बिना डर से चुदाई की और हम दोनों ने इस चुदाई के बहुत मजे लिए और जब मुझे मौका मिलता तो में उसे अपने घर पर भी ला कर चोदता था और वो बड़े मजे से चुदवाती थी।

धन्यवाद …

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