पति से लिया बेज़्ज़ती का बदला

प्रेषक : पारुल …

हैल्लो दोस्तों, में पारुल आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपनी एक ऐसी सच्ची घटना सुनाने जा रही हूँ, जिसके मैंने पूरे पूरे मज़े जरुर लिए, लेकिन उसके बाद में मुझे बहुत अफ़सोस भी हुआ, क्योंकि यह सब कुछ मेरे पति की एक बात की वजह से हुआ। दोस्तों अब में सीधी अपनी कहानी पर आती हूँ और वो सारी बातें आप सभी को विस्तार से बताती हूँ। दोस्तों एक दिन कचरे से भरे बेग को फेंककर जब में पीछे मुड़ी तो हमारी बिल्डिंग के सामने खड़े उस आदमी को देखकर मेरे मन में ना जाने क्यों एक अजीब सी खलबली और डर सा भी लगा। जिसकी लम्बाई 6 फिट, काला बदन, मोटा, काले बालों से ढका उसका पूरा शरीर, राक्षस जैसा रूप। दोस्तों वो हमारी बिल्डिंग का चौकीदार था और उसने मुझे अपनी खा जाने वाली नजर से देखा। मैंने उसको एक नज़र देखकर अपना पल्लू ठीक किया और सर को झुकाकर कचरे के डब्बे को सख़्त से पकड़ उस कातिल नज़र को पार करती हुई जल्दी से में अपने घर में घुसकर मैंने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया।

दोस्तों वैसे मेरे इन बूब्स ने मुझे बचपन से ही बहुत परेशान किया, मेरे बूब्स का आकार 36 है। में मोटी होती तो फिर भी बात अलग थी, लेकिन इस 26 की पतली कमर पर तो इन दोनों बड़े आकार के आमों को कितना भी ढक लो, यह सभी को अपनी आकर्षित जरुर करते थे, इसलिए हमेशा मैंने इन्हे बचाकर रखा था और सोचा था कि यह जवानी सिर्फ़ में अपनी शादी के बाद अपने पति को दूँगी। मेरा रंग बहुत गोरा और में दिखने में बहुत सुंदर हूँ। मेरा ऐसा फिगर कि हर कोई मेरी तरफ लट्टू हो जाए। दोस्तों मेरे पापा ने भी उनको इंजिनियर है बताकर उनसे मेरी शादी करवा दी थी, लेकिन सुहागरात को घुसते ही उनका बीज निकल गया। उनका बहुत छोटा सा 4 इंच लंबा पतला गोरा सा लंड। अब मुझे पता चला कि में कोलकाता से इतनी दूर राँची में कितनी अकेली हूँ और पहले पूरे सप्ताह में एक या दो बार ही मेरी अधूरी चुदाई होती, वो सारा दिन काम करते थे इसलिए वो जल्दी थककर सो जाते और में शर्मीले स्वभाव की लड़की उनसे बोलती भी क्या?

दोस्तों मेरी शादी के दो साल ऐसे ही हो गये और वैसे यह चौकीदार तब से यहीं इस बिल्डिंग में है, वो करीब 50-55 साल का तो होगा। एक बार रात को में करीब एक बजे पेशाब करने के लिए उठी और पेशाब करने के बाद मैंने सोचा कि थोड़ा बालकनी में हवा खा लेती हूँ। मैंने लाईट जलाए बिना ही बालकनी से देखा तो हर रोज की तरह वो चौकीदार और उसके दो शराबी फुटपाती दोस्त रोड़ लाईट के नीचे बैठकर किसी लड़की का मज़ाक बनाकर हंस रहे थे। मुझे उनकी बात सुनने में बहुत मज़ा आता था।

उनमे से एक : अरे यार तू जब उसका पति नहीं रहेगा तब घुस जाना।

चौकीदार : साली के बूब्स ने मुझे पिछले दो साल से बहुत परेशान कर रखा है।

दूसरा : हाँ तो और कब तक लंड हिलता रहेगा? जाकर चोदकर उसकी चूत की दीवारे छील डाल।

दोस्तों में उनकी बातें सुनकर समझ चुकी थी कि आज इनके बीच में बस मेरी ही चर्चा हो रही है। मुझे उनकी बातें सुनकर बहुत गुस्सा आया, लेकिन में करती भी क्या?

फिर चौकीदार अपने लंड को लूँगी के ऊपर से घिसते हुए उठा और लड़खड़ते हुए पीछे मुड़ा और झट से लूँगी ऊपर करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया, में घबरा गई। फिर उस 6 इंच लंबे और 2 इंच मोटे लंड से एक पानी की धार निकलने लगी, वो मुड़ा और अब उसने बोतल को उठाकर लड़खड़ते हुए वो अपनी झोपड़ी की तरफ चल दिया। तब तक मैंने अपनी मेक्सी के अंदर दोनों पैरों के बीच एक गीलापन महसूस किया जो बालकनी की हवा से ज्यादा ठंडी महसूस हो रहा था और फिर में जाकर अपने पति के पास लेट गई और अपनी आखों को बंद किया, लेकिन यह क्या? वो काला लंड फिर मेरी आँखों के सामने था। में किसी तरह उसको भुलाने की कोशिश करते करते सो गई और सुबह उठी और पति को खाना बनाकर ऑफिस भेजकर में बाज़ार निकली। नीचे जाते ही वो आदमी मुझे दिखा।

चौकीदार : मेडम क्या बाज़ार चली?

में अंदर तक काँप गई, लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत जुटाकर कहा कि हाँ और वहां से निकल गई। आख़िर अगर आपको पता हो कि एक आदमी आपके बूब्स का दीवाना है और आपको घूरता है तो आप कैसे उससे बात कर पायेंगे। फिर जब में लौटी तो वो फिर से खड़ा हो गया और मेरे पास आकर बोला कि लाइये मेडम जी मुझे दे दीजिए, लेकिन मैंने पिछले बार की तरह उसे वो सामान नहीं दिया। उसने बहुत बार माँगा, लेकिन मैंने उससे मना करती हुई अपने घर में चली गई। फिर मुझे डर लगा कि हे भगवान मैंने यह क्या किया? कहीं उसे शक तो नहीं हो गया कि में उसके इरादो को जान गई हूँ और में यह सोचते हुए खिड़की से उसे देखने लगी। जैसे ही मैंने पर्दे के एक हिस्से को साइड में किया तो झट से उसे वापस मुझे गिरना पड़ा, क्योंकि वो साला अब इसी तरफ देख रहा था। दोस्तों पता नहीं उसके बाद मुझे क्यों ऐसा ख्याल आता रहा कि वो मोटा काला लंड जिसके ज्यादा घुँगराले गंदे बाल है जो नसो से जकड़ा हुआ है वो मेरी गोरी और साफ चूत में बहुत बेरहमी से अंदर घुस और बाहर निकल रहा है और मुझे कभी कभी ख्याल आता था कि शायद वो मुझे एक बार मेरे घर में ज़बरदस्ती घुसकर मेरे बूब्स और चूत का सही इस्तेमाल करे, मेरी इन आकर्षक निप्पल जो गुलाब जैसी लाल है इन्हे अपने मुहं में लेकर अपने काले होठों से खेले, लेकिन यह सब भारत में संभव नहीं है और यह बात सोचकर में अपनी इच्छाओ को दबा देती, लेकिन वो मेरे पीछे ही पड़ा रहता और अब धीरे धीरे उसकी हिम्मत बढ़ती ही जा रही थी। कभी में बाज़ार से आती तो मेरा बेग लेने के बहाने वो मेरे हाथ पकड़ लेता और में डरकर उसे बेग दे देती। में कचरा फेंकने जाती तो खुले आम मेरे बूब्स को घूरता और नज़र जाने पर जानबूझ कर अपनी जीभ को होंठो पर फेरता तो में शरमाकर घर भाग आती, लेकिन यह सब अब मुझे एक सुंदर अनुभव लगने लगा था।

एक बार में जब बालकनी से कपड़े लेने गई तो मेरी एक ब्रा खो चुकी थी और अगले दिन जब में कपड़े धो रही थी तो मेरे पति भी उस समय ऑफिस में थे और तभी दरवाजे की घंटी बजी। दरवाजा खोला तो वो आदमी खड़ा मुस्कुराता हुआ बोला कि मेडम जी यह लीजिए आपकी ब्रा। अब मैंने गौर से देखा तो वो मेरी ब्रा थी। मैंने हाथ बढ़ाकर ले लिया और धन्यवाद बोलकर दरवाजा बंद कर दिया। फिर गौर से देखा तो उस हरामी ने उसमे जानबूझ कर माल फेंका था। बिल्कुल चादर में जैसे मेरे पति का वीर्य का दाग होता है वैसा ही उसमे एक कड़क धब्बा था। मैंने गुस्से में उसको कचरे में फेंक दिया, लेकिन मुझे फिर उसके लंड की याद आ गई और में चुदने के लिए तड़प उठी। मेरे पति ने मुझे 10 दिन से छुआ भी नहीं था, जबकि मेरी जवानी जबर्दस्त चुदाई की हकदार है तो पति के घर आने से पहले में बहुत सजने लगी और मैंने एक हॉट सी मेक्सी पहनी और तभी घंटी बजी और दरवाजा खोला तो वो मेरे पति थे, लेकिन वो बहुत थके हुए अंदर आए, वो बैठे और उन्होंने मुझसे पानी माँगा तो मैंने उनको लाकर दे दिया और प्यार से उनके पीछे से जाकर उनको पकड़ा और अपने बूब्स को उनकी गर्दन के दोनों तरफ फंसाया और उनके सर को चूमा। फिर अचानक से उन्होंने मुझे एक धक्का दे दिया और कहा कि यह क्या बचपना है, मुझे कुछ देर शांति से बैठने भी नहीं देती। दोस्तों उनके इस व्यहवार से मुझे बहुत गुस्सा आ गया और मैंने भी उनसे झगड़ा किया। मैंने उनसे कहा कि तुम ने पिछले दो सप्ताह से मुझे एक बार छुआ तक भी नहीं, ऐसा ही था तो तुमने मुझसे शादी क्यों की? लेकिन उन्होंने मुझसे बातों ही बातों में कहा कि तुम एक ठरकी औरत हो और तुमसे शादी करके में खुद फंस गया हूँ। दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर में एकदम से चौंक गई और अब में उनसे कुछ ना कह सकी और वो बिना खाना खाए सो गये। में भी सोफे पर जाकर रो रही थी और अपनी किस्मत को कोस रही थी और ना जाने कब मेरी भी नींद लग गई और जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि वो अपने ऑफिस जा चुके थे, लेकिन मुझे उनकी ठरकी वाली बात काट रही थी और अब में सोच रही थी क्या मैंने इसी दिन के लिए अपनी जवानी इस चूतिये के लिए संभालकर रखी थी? मुझमे एक गुस्सा उमड़ा कि में अपने मायके कोलकाता चली जाऊँ। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

तभी मैंने बालकनी से झाँका तो चौकीदार नीचे बैठकर अपनी धुन में कोई बिहारी गाना गा रहा था और मुझे एक तरकीब सूझी जिससे मेरे इस झगड़े की वजह ही नहीं रहेगी और में अपने पति की इस बदसलूकी का बदला भी ले सकूँगी। अब मैंने अपनी कचरे की बाल्टी उठाई और में बिना चुन्नी के मेक्सी में नीचे जाकर बोली कि चौकीदार ज़रा यह कचरा फेंक आना, वो मुझे इस हालत में देखकर चौंकते हुए हाँ जी मेडम और कचरा फेंककर आने के बाद वो मुझे वहां पर नहीं पाकर मेरे घर के पास आया तो उसने देखा कि मेरा दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था इसलिए वो मेडम आपकी कचरा दानी लीजिए यह बात बोलकर जैसे ही उसने दरवाजा खोला, तो मैंने किचन से आवाज़ देकर कहा कि हाँ तुम उसे अंदर रखकर बैठो और चाय पीकर जाना, यह बात कहकर मैंने अपनी मेक्सी के सारे ऊपर के बटन खोल दिए और मेरी ब्रा के चंगुल में फंसकर मेरे दोनों बूब्स मिलकर एक मस्त नजारा बना रहे थे। फिर में किचन से बाहर निकली तो मैंने देखा कि वो काला लंबा आदमी कुर्सी के पास खड़ा है और मैंने उसको बैठने के लिए कहा और अब जैसे ही मैंने उसके सामने झुककर उसे चाय दी तो मैंने उसकी सबसे पसंदीदा जगह को उसे दिखा दिया। में उसको बहुत अच्छे से अपने बड़े बड़े बूब्स को दिखाकर खड़ी हुई और फिर उससे मुस्कुराकर पूछा कि बताइए कैसा है?

दोस्तों वो तो बहुत ही शातिर निकला और बोला कि पहले मन भरकर पी तो लूँ और में मुड़कर वापस आने लगी। तभी एक डर ने मुझे हिला दिया कि यह में क्या कर रही हूँ? एक झगड़े के लिए में अपनी सारी शादीशुदा जिंदगी दांव पर लगा रही हूँ और तभी वो पीछे से बोला कि मेडम जी में क्या आपसे एक बात कहूँ? तो मैंने कहा कि हाँ कहो, तो वो बोला कि कल रात को आपके पति का आपके साथ जो कुछ भी झगड़ा हुआ था वो सब कुछ मैंने सुना है। दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरी तो जैसे हवा ही निकल गई, मेरे पूरे चेहरे का रंग उड़ चुका था और में पसीने से भीग चुकी थी। फिर वो मुझसे बोला कि में उस समय जागा हुआ था, क्यों वो आपको बिल्कुल भी प्यार नहीं करते ना? यह बात कहकर उसने मेरे कंधो पर हाथ रख दिया, जिसकी वजह से में बिल्कुल सिहर उठी और मेरी आखें भर आई, क्योंकि शायद आज इतने दिन बाद कोई मेरे दर्द को महसूस कर रहा था और अब में उसके हाथ को हटाकर आगे जाने लगी कि तभी दो मजबूत हाथों ने मुझे मेरी कमर से पकड़ लिया और मैंने कहा कि छोड़ो दरवाज़ा खुला है कोई हमे देख लेगा और यह बात कहकर मैंने उसके दोनों हाथों को अपने से अलग किया और जाकर अंदर से दरवाज़ा बंद किया और पीछे मुड़ी और फिर मैंने कहा कि देखो में उस झगड़े से बहुत परेशान हूँ और तुम अब चले जाओ, लेकिन वो तो एकदम पक्का खिलाड़ी निकला। उसने मुझसे कहा कि जब आपका पति आपको खुश नहीं कर पता तो आप उसके भरोसे क्यों हो? हमें भी एक मौका दो ना और मुझसे यह बात कहकर वो अपनी बेल्ट को खोलने लगा। फिर चैन खोलते हुए पेंट को नीचे गिरा दिया ऐसा करते ही उसका तनकर खड़ा लंड बाहर आ गया, जिसको देखकर में डर गई। मैंने उससे कहा कि बस अब रुक जाओ नहीं तो में दरवाज़ा खोलकर ज़ोर से चिल्लाऊँगी। दोस्तों वो मेरी बात को सुनकर हंसने लगा और उसने कहा कि कल ही तुम्हारे पति ने तुम्हे ठरकी कहा है और आज अगर सबको पता चला तो सोचो तुम्हारा पति तुम्हे घर से भी निकालेगा, तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम मुझे खुश करो और अपने पति की बेज़्ज़ती का बदला तुम मुझसे चुदवाकर लो।

दोस्तों उसके मुहं से यह सभी शब्द सुनकर मेरे तो पैरों तले ज़मीन खिसक गई और उसने अपनी शर्ट को उतारा और वो पूरा नंगा होकर मेरी तरफ बढ़ रहा था और में अपने इस कमसिन बदन को ढीला पड़ता हुआ महसूस कर रही थी। इतने में उसने मेरे पास आकर मेरे हाथों को दबाकर दरवाज़े पर टिका दिया और वो मेरी गर्दन पर चूमने लगा। दोस्तों में कुछ नहीं कर पा रही थी और वो मेरी गर्दन के दोनों तरफ चूमे जा रहा था, लेकिन मे अपने गुलाबी होंठो को बचाने में कामयाब हो रही थी और तभी उसने मेरे दोनों हाथों को अपने एक हाथ से पकड़ा और मेरी गर्दन को दबाने लगा। में कुछ सोच पाती कि उससे पहले ही वो मेरे होंठो को अपने काले होंठो से चूस रहा था और मैंने भी अपनी दोनों आँखे बंद करके मज़ा लेने लगी थी। अब हम जीभ को टटोल रहे थे और मेरी कमर पर एक भीगी सी चीज़ घिस रही थी और देखा तो वो उसका लंड था, करीब 6 इंच लंबा और एकदम काला, जिसका लाल रंग का सुपाड़ा जो एक हल्की सी काली चमड़ी से ढका हुआ था। में अब बहुत मदहोश हो रही थी, क्योंकि मैंने बहुत दिनों से इस लंड को लेने के सपने देखे है। अब मैंने उसे अपने हाथ से थाम लिया और मेरा हाथ उसके सुपाड़े को उस चमड़ी से मालिश कर रहा था। में थोड़ा सा झुकी और मैंने उसके लंड को सूँघा वाह क्या कमाल की सेक्सी खुशबू थी। मैंने तुरंत उसे अपने मुहं में ले लिया और फिर चूसने लगी वो आआअहह अह्ह्ह सस्स्सह।

दोस्तों में करीब 16-17 बार उसके लंड को चूसकर ऊपर आ गई उसका लंड अब आसमान की तरफ देख रहा था। फिर उसने जल्दी से मेरी पहले से खुली मेक्सी को उतार फेंका। अब में ब्रा और पेंटी में खड़ी हुई थी और वो पागलों की तरह मेरे बूब्स के बीच दरार में अपना मुहं घुसा रहा था और पेंटी के ऊपर से मेरी गांड और चूत पर अपना हाथ घुमा रहा था। दोस्तों मेरे बूब्स और चूत पर मेरे पति कभी मुहं नहीं मारते, क्योंकि उन्हे ऐसा करने से बहुत घिन आती थी और आज वो सब करवाने का मौका मेरे पास था। मैंने मौका देखकर हाथ पीछे ले जाकर जैसे ही अपनी ब्रा का हुक झटके के साथ खोला तो मेरे दोनों लाज़वाब बूब्स बाहर झूल पड़े और उसने झट से मेरी एक निप्पल को अपने काले मुहं में ले लिया और अपने एक हाथ से वो मेरी कमर को खींचकर पकड़े हुए था और अपने दूसरे हाथ से मेरी उस चूत को नीचे से सहला रहा था और ऊपर से बूब्स को चूस रहा था। फिर में आआहह उह्ह्ह्ह  सस्स्शह करके चिल्ला रही थी और आँख बंद करके सर को दरवाज़े पर धम धम से पीट रही थी। में अपने पैरों को ज़मीन से ऊपर ले आई, लेकिन वो मुझे हवा में चूसे जा रहा था और में उसके कंधो को और सर को सहला रही थी और उसके सर को अपने बूब्स पर दबा रही थी और में अब जन्नत की सेर कर रही थी। फिर तभी अचानक से मेरा पूरा बदन कांप उठा और में झड़ गई। मैंने उसे अचानक से एक धक्का मार दिया और उससे छूट गई और में जाकर बेड पर बैठ गई। फिर मैंने उससे कहा कि अब बस करो मेरे पति आते ही होंगे प्लीज तुम अब यहाँ से चले जाओ। अब वो मुझसे बोला कि चुपकर साली तू मुझे पागल बनाती है, तेरा पति 7 बजे से पहले नहीं आता और अभी सिर्फ़ एक बजे है और मैंने अब तक सिर्फ़ एक ही बूब्स को चूसा है वाह क्या स्वादिष्ट है? आज से में इन्हें अब हर रोज चूसूंगा समझी, वो मुझसे यह बात बोलकर मेरे ऊपर आ गया और अब वो मेरे दूसरे बूब्स पर टूट पड़ा। में बिल्कुल पागल सी होकर छटपटा रही थी और अपनी छाती को उसके मुहं पर धकेलती और उससे कहती हाँ और ज़ोर से चूस इन्हे आआहहह वो साला मुझे ठरकी बोल रहा था आईईईइ आज से यह बूब्स बस तुम्हारे है, जब मन हो आकर चूसना उफ्फ्फ वो और जोश में आकर चूसने और अपनी जीभ से खेलने लगा, वो फिर मुझे उल्टा करके मेरी पीठ, कमर और गांड को चूमता काटता और रगड़ता रहा। मैंने उसके सर को धीरे धीरे अपने पैरो के बीच रख दिया। फिर तो वो मेरी चूत को चूसने लगा और मेरी चूत के दाने पर अपनी जीभ को फेरने लगा। में आहहाअ ऊह्ह्ह्ह मेरे शरीर फिर कांप उठा और कुछ ही देर बाद में झड़ गई, वो मेरी जांघो को पकड़े चूमता हुआ फिर बीच में गया और उसने मेरी चूत पर थूक दिया और फिर वो मेरी चूत में अपनी एक अंगुली को डालने लगा, जिसकी वजह से में सिहर उठी।

फिर मैंने कहा कि प्लीज अब डाल भी दे अपने लंड को मेरी इस चूत में, मुझे बहुत खुजली हो रही है, वो अब मेरे ऊपर आ गया और अपनी बाल से भरी हुई छाती को उसने मेरे बूब्स के ऊपर दबा दिया, जिसकी वजह से उसका बड़ा पेट मेरी कमर पर दब रहा था और उसका मोटे लंड का सुपाड़ा मेरी चूत की गुलाबी पंखुड़ियों को छेड़ रहा था। फिर उसने लंड को अपने एक हाथ से पकड़ा और चूत के मुहं पर टिका दिया, तो में काँपने लगी और तभी उसने एक जोरदार धक्का मारा, लेकिन लंड फिसलकर मेरी नाभि से जा टकराया और में हंस पड़ी। अब मैंने अपने एक हाथ को हम दोनों की छाती के बीच में घुसाकर उसके लंड को पकड़कर दोबारा ले जाकर अपनी चूत के मुहं को दूसरे हाथ से खोलकर उसके सुपाड़े को उनके बीच रखा, वो यह सब देखकर और भी जोश में आ गया और उसने अपने दोनों हाथ मेरी छाती के दोनों तरफ रखकर मेरे मुहं पर अपना मुहं लगाया और एक ज़ोर का धक्का मारा।

अब में आईईईइ ऊऊहह आह्ह्हह्ह में मर गई रूको, तो वो रुक गया और अब वो मेरे मुहं को छोड़कर मेरी गर्दन को चूमने लगा। मैंने अब जाकर चैन की सांस ली और फिर वो बहुत धीरे धीरे से अपने लंड को आगे पीछे करने लगा। तब मैंने महसूस किया कि उसका लंड अब मेरी चूत के अंदर प्रवेश किए जा रहा था और अब मुझे दर्द की जगह एक ऐसी जन्नत का एहसास हुआ, जिससे में अब बिल्कुल अंजान थी और मेरे मन में यह बात भी थी कि एक गंदा सा आदमी मुझे मेरे ही सुहागरात के बिस्तर पर बुरी तरह से रौंद रहा है में कितनी गंदी हूँ। फिर में और भी जोश में आ गई और उसे पलटकर उसके ऊपर चड़ गई और अपनी चूत में उसका लंड रखकर उछालने लगी थी और उससे बोलने लगी थी कि हाँ चोद दे उफफ्फ्फ्फ़ आईईईई इस ठरकी औरत को, मेरी चूत को अपने इस तगड़े लंड से चोद चोदकर फुला दो ताकि में अपने उस हरामी पति से अपनी उस बेज़्ज़ती का बदला ले सकूँ। दोस्तों में अब पूरे जोश में आकर ऊपर से उछल रही थी और वो मुझे नीचे से धक्के लगाए जा रहा था। उसने मुझसे कहा कि आअहह्ह्ह बड़ी टाइट और रसीली चूत है रे और यह तेरे दोनों बूब्स उछलते हुए कितने सुंदर लगते है? मुझसे यह बात कहकर वो उठकर मेरे बूब्स को चूसने लगा और में जोश में आकर उससे बोली हाँ चूस ले इन्हे भी, इन्होने भी मुझे बचपन से बहुत परेशान किया है उफफ्फ्फ्फ़ उफफ्फ्फ्फ़ थोड़ा और ज़ोर से चूस, वाह मज़ा आ गया आईईईइ वैसे मुझे इन्हे सबसे पहले ही चुसवाना चाहिए था। अब वो मुझे अपनी गोद में लेकर खड़ा हो गया और फिर वो खड़े खड़े हवा में मुझे धक्के देकर चोदने लगा। मैंने उसको कसकर पकड़े हुए थी और वैसे ही 15 मिनट लगातार धक्के देकर चोदने के बाद उसने मुझे ज़मीन पर लेटा दिया और अब वो एकदम जोश में आकर स्पीड से मेरी चूत की धुनाई करने लगा था, जिसकी वजह से पूरे कमरे में छप छप खप खप फच फच की आवाज़ गूँज़ रही थी। में अब तक चार बार झड़ चुकी थी। अब वो मुझसे बोला कि में अब झड़ने वाला हूँ और मैंने उससे कहा कि हाँ में भी और उसके बाद ज़ोर के 4-5 धक्के मारने के बाद उसने सारा माल मेरी चूत के अंदर ही गिरा दिया और वो मेरे पास में गिर पड़ा। फिर मैंने अपनी हालत देखी और मेरी खुली हुई चूत में से उसका बहुत सारा वीर्य टपक रहा था। मेरे बूब्स पर उसके मुहं के लाल निशान बन गये थे और मैंने देखा तो एक काला बुढ्ढा आदमी मेरे पास पड़े हाँफ रहा था मुझे उसको अपने पास देखकर थोड़ी घिन तो जरुर आई, लेकिन मैंने अपने बदले के बारे में सोचकर खुद को बहुत दिलासा दिया।

दोस्तों यह थी मेरी चुदाई की सच्ची दास्तान, जिसमें मैंने ना चाहते हुए भी बदले की भावना में आकर अपनी चूत को कुर्बान कर दिया। मुझे अपनी मस्त वाली चुदाई की मन ही मन ख़ुशी भी थी, लेकिन चुदाई खत्म होने के बाद में थोड़ा सा दु:ख भी हुआ, लेकिन अब सोचने के क्या फायदा था वो तो अपना काम कर गया था और में उसके लंड से चुदकर अपने आप को बहुत संतुष्ट समझ रही थी। दोस्तों ऐसा सुख अगर मुझे अपने पति से पहले ही मिला होता तो में उस गंदे आदमी से अपनी चुदाई क्यों करवाती? लेकिन जो भी हुआ सब ठीक हुआ ।।

धन्यवाद …

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