प्यासी मौसी की चूत की खुजली – 2

प्रेषक : बहादुर

“प्यासी मौसी की चूत की खुजली – 1” से आगे की कहानी …

दोस्तों फिर एक सप्ताह बाद हम लोगो को मौका मिल गया। अंकल को अपने फ्रेंड के भाई की बारात में उनको आउट ऑफ स्टेशन जाना पड़ा, वो तीन दिन के लिए घर से बाहर चले गये और उनके ससुर भी पहले से ही अपने भाई के यहाँ पांच दिनो के लिए चले गये थे, सिर्फ़ उनका बेटा था जो स्कूल, कोचिंगो और खेलने कूदने मे बिजी था। उस दिन मैं सुबह जल्दी जाग गया और सात बजे उनके घर पहुँच गया। मौसी अपने बेटे को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थी, मैं बैठ कर टीवी देखने लगा। वो मुझे देख देख कर स्माइल दे रही थी और मुझे मेरे कान मे आकर कहा कि में बाबू को स्कूल ड्रॉप करके आती हूँ घर को बाहर से लॉक करके जाउंगी तुम अंदर रहना मैं वापस पीछे के दरवाज़े से आ जाउंगी तुम इंतज़ार करना और आवाज़ नहीं करना क्योंकि दरवाज़ा बंद देखकर कोई गेस्ट घर मे भी नहीं आएँगे और हमे पूरे पांच घंटे का टाईम मिलेगा, मैंने उन्हे बताया कि में मम्मी को कहके आया हूँ कि क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने जा रहा हूँ शाम हो आ जाऊंगा आते आते खाना वहीँ खा लूँगा।

में ब्लू फिल्म की एक डीवीडी लाया था, उनके जाने के बाद उसे डीवीडी प्लेयर मे डाल कर टीवी से कनेक्ट कर रखा था और मौसी के आने का इंतज़ार कर रहा था उनको पॉर्न फिल्म दिखाने के लिए फिर 15 मिनट के बाद जब वो आ गयी क्योंकि स्कूल पास में ही था। मौसी आने के बाद वो समझ गयी थी कि आज तो कुछ जोरदार और स्पेशल होने वाला है, मुझे पांच मिनट रुकने को कहाँ और कपड़े बदल कर आ गयी। मौसी ने कहा कि चलो आज हम तुम आज़ाद हैं हर काम को करने के लिए और मेरे बगल मे आकर बैठ गयी।

घर पर हम दोनो के अलावा कोई नहीं था तभी मैंने कहा कि पहले हम टीवी देखेंगे 45 मिनट और मैंने डीवीडी ऑन कर दिया और टीवी मे पॉर्न मूवी चलने लगी मौसी खुश हो गयी, उस फिल्म में लड़का लड़की एक दूसरे को किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़े उतार रहे थे, लड़की लड़के के लंड को हाथ मे लेकर हिला रही थी और फिर उसे चाटने लगी थी और अपने मुहं मे अंदर बाहर करने लगी थी और लड़का लड़की की चूचियों को अपने एक हाथ से दबा रहा था।

खास तौर पर निप्पल और दूसरे हाथ से उसकी चूत मे उंगली डाल कर हिला रहा था, इस सीन को देखकर मौसी के रोंगटे खड़े होने लगे थे और फिल्म आगे बड़ी लड़का लड़की की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा था, जिससे मौसी और खुश हो गयी और फाइनली लड़के ने अपने लंड को लड़की की चूत पर रखकर धक्का मारा और पूरा लंड चूत मे घुस गया और वो धीरे धीरे आगे पीछे करके हिलाने लगा और थोड़ी देर मे अपनी हिलाने की स्पीड को तेज कर दिया, जिससे कि लड़की का करहाना शुरू हो गया था।

उसकी आवाज़ सुनकर मौसी पूरी टाईट हो चुकी थी, लड़के ने लड़की को हर पोज़िशन पर चोदा और उसकी गांड भी मारी और लड़की के फेस पर वीर्य गिरा दिया फिर मैंने पांच मिनट बाद टीवी ऑफ कर दिया था और अपनी शर्ट पेंट उतार कर मौसी के पास आकर उन्हे कस कर पकड़ लिया मौसी पूरी तैयार थी। मैंने कहा कि हम इस फिल्म की तरह ही सेक्स करेंगे, मौसी ने कहा कि बिल्कुल वैसे ही करेंगे, मैंने मौसी की मेक्सी उतार दी थी वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी मे थी और में भी अंडरवियर मे था।

मैंने उनकी चूचियों को दबाना शुरू किया और उनकी दोनो निप्पल को ज़ोर से दबाया और उनकी ब्रा पेंटी भी उतार दी, एक हाथ से मैंने उनकी चूत मे हाथ फेरना शुरू किया और उंगली अंदर बाहर करने लगा, फिर मैं खड़ा हो गया और मौसी ने मेरी अंडरवियर उतार दी, मेरे लंड को अपने हाथ से हिलाने लगी थी और स्किन पीछे करके अपने मुहं मे ले लिया और लॉलिपोप कि तरह चूसने लगी थी। लंड पूरा टाइट होकर आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा हो गया था।

क्योंकि पहली बार कोई मेरे लंड को अपने मुहं से चाट रहा था, मुझे लगा कि में अब झड़ सकता हूँ, इसलिए मैंने उन्हे रोका और फिर मौसी को बेड पर लेटा दिया और उनके दोनों पैर फैलाकर उनकी चूत को चाटने लगा। उनकी चूत के ऊपर मुहं लगाकर मैंने पहली बार जब चूसना और चाटना शुरू किया तो उनके होश उड़ गये। क्योंकि पहली बार कोई उनकी चूत को चाट रहा था। अंकल ने भी ऐसा नहीं किया था उनके साथ। मैंने उनकी चूत को ऐसे चूसा और चाटने लगा कि उनकी चूत से पानी निकलने लगा।

अब वो एक बार झड़ गयी। मैंने पहली बार चूत का पानी चखा था, मौसी की चूत चाटने के वजह से वो कराह रही थी ज़ोर ज़ोर से। में समझ गया कि अब सही समय है उनको चोदने का और मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रख कर जोरदार धक्का मारा और मेरा आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड उनकी चूत मे घुस गया और में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाता रहा और मौसी ने भी मेरा साथ दिया 15 मिनट के बाद मुझे लगा कि में झड़ने वाला हूँ।

इतने मे मौसी कि हालत भी बहुत खराब हो गयी थी और उनके कराहने की आवाज़ और तेज़ हो गयी थी, मैंने अब लंड चूत से निकाल कर उनके ऊपर बैठकर उनके फेस पर पूरा वीर्य गिरा दिया, उन्होंने भी पहली बार मेरा वीर्य चखा क्योंकि अंकल के साथ मुहं से सेक्स कभी भी नहीं किया था और वीर्य गिरने के बाद में फिर से मैंने लंड को चूत मे डाल दिया और उन्हे डॉगी स्टाइल मे 15 मिनट तक चोदता रहा।

अब मौसी पूरी संतुष्ट लग रही थी पर मैं अभी और करना चाहता था, इसलिए मैंने उन्हे बेड से उतार कर जमीन मे सटा दिया और पीछे से सात आठ मिनट तक चोदा। मौसी ने मेरे होंठो की और निप्पल की तो मैंने चूसकर ऐसी हालत कर दी जैसे क़िसी ने काट लिया हो, दोनो बूब्स लाल हो गये थे। मौसी की बॉडी मे मैंने बहुत जगह किस किया था, चूत चुदाई के बाद लंड नॉर्मल हो गया था और में थक गया था।

लेकिन मन नहीं थका था इसलिए मैंने मौसी को लंड चूसने को कहा और थोड़ी देर तक आराम किया और मौसी के लंड चूसने से फिर से लंड खड़ा हो गया था। अब मैंने उन्हे कहा की अब में आपकी गांड चोदूंगा, मौसी ने वेसलीन लंड पर लगाने को कहा और अपनी गांड पर भी लगाया, फिर मैंने उनकी गांड के मुहं को अपने हाथो से बहुत मसला और मौसी को डॉगी बनने को कहा और उनकी गांड के छेद में थोड़ा थूक लगाया और धीरे से लंड सटाया और थोड़ा ज़ोर लगा कर एक बार मे लंड को गांड मे घुसा दिया।

जिससे उन्हे पहले शॉट मे तक़लीफ़ हुई और में जोर से धक्के मारता रहा मौसी भी गांड हिला कर मेरा साथ देते रही दस मिनट तक और अब मैं झड़ने वाला था। इस बार मैंने उनके पेट पर वीर्य गिरा दिया था। मौसी को गांड मरवाने मे बहुत दिक्कत हुई क्योंकि अंकल का लंड, मौसी ने बताया कि मेरे लंड से बहुत छोटा चार इंच लंबा और दो इंच मोटा था, लेकिन अंकल चूत से ज़्यादा गांड मारना पसंद करते हैं और उन्होने मौसी की गांड मार मार कर बहुत चौड़ी कर दी थी।

अब मैंने सोचा था कि गांड मारना दर्द्कारक होगा मौसी के लिए पर मौसी ने थोड़े दर्द के साथ बहुत मस्ती से गांड चुदवाई, जब में थक कर बेड पर लेट गया तो मौसी मेरे बगल मे आकर लेटी थी और थोडी देर बाद मेरे ऊपर बैठ गयी और लंड को हाथो से और चुम्मा चाटी करके फिर से खड़ा किया और चूत मे लगा कर खुद ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगी थी, मैं हैरान हो गया पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मौसी ने करीब दस मिनट तक लंड हिलाया था।

इस बीच मैंने उनकी चूत मे ही वीर्य गिरा दिया था, मौसी भी पूरी थकी हुई थी और मेरे बगल मे लेट गयी, फिर हम लोग एक साथ बाथरूम मे जाकर नहाए और मैं अपने घर चला गया था और हम दोनो ने तीन दिन तक रोज लगातार जम कर सेक्स किया था। मौसी मेरी गर्लफ्रेंड जैसी है और फिर चार महीने बाद हम लोग हमारी नानी के यहाँ अपने गावं गये थे, कोई मन्नत पूरी करनी थी मौसी को अपने बेटे की। वहाँ तो हम लोगों ने हद कर दी क्योंकि गावं मे बिजली नहीं है और हमने वहाँ पर अंधेरे का खूब फायदा उठाया और टॉयलेट भी नहीं था जिसके लिए खेत मे जाना पड़ता था। मेरे घर से मेरी मम्मी और में वहाँ पर गये थे और मौसी के घर से मौसी और उनका बेटा सिर्फ़ गावं गये थे, हम लोग पूरे दस दिनो के लिए गये थे। नानी के घर मे नानी के अलावा सिर्फ़ एक बड़े मामा जिनकी शादी नहीं हुई है, जो कि सन्यासी इंसान है और छोटी मामी रहते हैं। छोटे मामा दूसरे शहर मे काम करते हैं इसलिए हमेशा बाहर रहते हैं।

नानी का घर दस कमरो का था और कमरो के बीच मे आँगन है, चार कमरो को ही काम मे लेते थे और बाकी छ: कमरो को स्टोर रूम बनाकर लॉक कर रखे थे, एक कमरा बड़े मामा का, दूसरा कमरा नानी का, तीसरा छोटी मामी और चोथे कमरे को किचन बनाया हुआ था, चारो उसी लोग घर के चार कोने मे थे, बड़े मामा की दिशा वेस्ट, छोटी मामी की दिशा ईस्ट, नानी की साऊथ और किचन दिशा नोर्थ मे है और घर के दरवाजे दोनो तरफ खुलते है।

फिर हम लोग मन्नत सफल होने के कारण पूजा करने गये थे और पहले ही दिन पहुँच कर हम लोग उस मंदिर पर जाकर पूजा कर आए थे।

हम बाकी बचे हुए दिनो मे इधर उधर मस्ती ही करते थे। मुझे गावं मे बरमूंडा पहनने नहीं दिया नानी ने और कहा क्योंकि तुम बड़े हो गये हो तुम्हे लुंगी पहननी होगी घर में क्योंकि यहाँ गावं मे सभी समाज हँसी उड़ाएंगे और में चुप चाप मान गया और मामा की लुंगी पहनने लगा था। गर्मी शुरू ही हुई थी इसलिए हम सभी लोग बड़े मामा को छोड़ कर रात मे घर की छत पर सोते थे। छत पर देसी गद्दे डाल कर एक लाईन से सोते थे, सबसे पहले नानी, मम्मी, छोटी मामी, मौसी का बेटा, मौसी और मैं खुद सोता था। ज़्यादा रात होने पर ठंड लगती थी और इसलिए हम लोग कंबल काम में लेते थे ओढ़ने के लिए।

मैं और मौसी अगल बगल सोने का फायदा उठाते थे और रात मे हम सबके सोने के बाद चुपके से थोड़ा बहुत सेक्स कर लेते थे, गावं मे लोग जल्दी सोते हैं और जल्दी उठ जाते हैं, लेकिन वहाँ पूरे दिन हमें एक साथ रहने का फायदा भी हुआ दिन मे कोई छत पर नहीं जाता था, इसलिए हमे जब मौका लगता तो मैं और मौसी स्टोर रूम पर ऊपर की तरफ जाकर पूरा सेक्स करते थे।

वहाँ में मौसी को रेलिंग पकड़ा कर डॉगी स्टाइल मे चोदता था और गांड भी मारता था, दिन मे हम दो तीन बार वहाँ सेक्स का मज़ा लेते थे। जब टॉयलेट के लिए खेत मे जाते थे तो खेत मे भी हमने एक दो बार सेक्स किया था और बगीचे मे भी हमने चुदाई का मज़ा एक दूसरे को दिया था। लुंगी पहनने का फ़ायदा ये हुआ की जब मौका लगता मौसी कि मेक्सी ऊपर करके शुरू हो जाता था, मौसी भी गावं मे मेक्सी के नीचे कुछ भी नहीं पहनती थी, ना पेंटी और ना ही पेटीकोट, मेरी लुंगी पहनने का ज़्यादा फायदा मौसी ने लिया, हमेशा मेरे लंड को हिला देती थी, सोते जागते क़िसी भी समय और लंड पूरा टाईट हो जाता था और लुंगी मे टेंट बन जाता था, एक बार तो छोटी मामी ने मेरे टेंट को देख लिया था और मुझे देख हंसने लगी थी और तभी छत पर सोते हुए एक दिन मेरी लुंगी खुल गयी थी और मुझे नींद मे पता ही नहीं चला और जब छोटी मामी मुझे जगाने पहुँची तो मुझे पूरा नंगा देख लिया था और मुझे जगाने लगी थी और कहने लगी बाबू आप कैसे सोए हैं।

आपके जंगल के जीव जन्तु बाहर हो गये है, मैंने जैसे महसूस किया की लुंगी खुल गयी है मैंने तुरंत लुंगी से अपने को ढँक लिया था और में पूरा शरमा गया था। छोटी मामी भी मौसी की उम्र की थी और सुंदर थी, खेत मे टायलेट के लिए मौसी के साथ जाती थी और ये लोग मुझे साथ ले जाते थे, मैंने इनको भी पूरे नंगी देखा, डेली नहाते वक़्त भी में दोनो को नंगा देखता था क्योंकि ये लोग आँगन मे नहाते थे और में घर कि छत से देखता रहता था।

छोटी मामी भी मेरे सामने कपड़े बदलने मे नहीं शरमाती थी। उल्टे मुझे शरमाते हुए देख मुझ पर हँसती थी, मैंने उनके साथ सेक्स तो नहीं किया, लेकिन चूमा चाटी और चूची दबाना वगेरा और एक बार उनकी चूत मे उंगली भी की थी, जो मौसी को नहीं पता थी और मेरे और मौसी के सेक्स के बारे मे छोटी मामी को सब कुछ पता था, कम समय के कारण में छोटी मामी के साथ और उनके घर के काम मे बिज़ी होने के कारण उनके साथ सेक्स नहीं कर सका, नहीं तो छोटी मामी तो मुझसे सेट हो गयी थी।

हमारे आखरी दो दिनो मे वहाँ आँधी तूफान के साथ बारिश हुई जिसके कारण दो दिन हम लोगों को कमरे मे सोना पड़ा था, नानी बाहर चौक में सोती थी, मौसी का बेटा बड़े मामा के साथ उनके कमरे मे सोता थे, मम्मी और मौसी, छोटी मामी के साथ उनके कमरे मे बेड पर सोते थे और में नानी के कमरे मे चारपाई पर सो जाता था।

सबके सोते ही मौसी बेड पर तीन लोगों के साथ दीक्कत और गर्मी का बहाना करके मम्मी को पटा कर मेरे पास चारपाई पर सोने चली आती थी, दो दिन हम एक कमरे मे चारपाई पर एक साथ सोए थे। पहले दिन तो बाहर जोरदार बारिश हो रही थी और रात के दस बजे सब सोने चले गये थे और हम लोग भी अपने कमरे मे सोने चले गये। तभी मैंने कहा आज आपकी चूत और गांड की तो खेर नहीं, मौसी हंस रही थी।

वैसे यहाँ पर बिजली तो नहीं है इसलिए वहाँ लालटेन होता था तो मैंने लालटेन की लाइट को कम करके कमरे के बाहर रख दिया और अपनी चारपाई पर लेट गया और मौसी के आते ही उनकी मेक्सी उतार दी और अपने कपड़े भी उतार दिये और मौसी के जिस्म को बुरी तरह से चूमने चाटने लगा था और उनकी चूचियों के निप्पल पर दबा दबा कर उन्हे रुला दिया था, उनकी गांड को मसल मसल के पूरा गरम कर दिया था।

अब उनकी चूत मे दो उंगली से हिलाता रहा और उनके झड़ते ही मैंने अपने लंड को उन्हे चूसने को कहा, मौसी ने लंड चूस चूसकर पूरा टाईट कर दिया था और मैंने खुद के झड़ने के पहले लंड को उनके मुहं से निकाल लिया था और उनकी चूत को अंधेरे मे चूसके चाटके ऐसा किया कि एक बार और मौसी झड़ गयी थी और उनका मजा पूरा हो चूका था। तभी मैंने उन्हे चारपाई पर मुहं के बल सुला दिया और पीछे से लंड उनकी चूत मे घुसा दिया था। मुझे चारपाई पर चोदने मे बहुत मज़ा आ रहा था।

क्योंकि इसमे थोड़ा आराम से अच्छे धक्के लग रहे थे मौसी भी पूरी सहयोग कर रही थी अपनी कमर हिला कर और में पहली बार तीस मिनट तक चोदते हुए उनकी चूत मे अपना वीर्य गिरा दिया था अब में थक गया था।

तभी मौसी ने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर चढ़ गयी और चारपाई के सपोर्ट से मुझे चोदने लगी उन्होने ने भी दस मिनट तक दम लगाया और थक कर मेरी बगल मे सो गयी थी। हम दोनो आधे घंटे लेटे रहें और फिर मैंने कहा कि अब आपकी गांड की बारी है तभी मौसी ने कहा कि यहाँ वेसलिन नहीं है, मुझे बहुत दर्द होगा। तभी मैंने कहा और कोई दूसरा ऊपाय नहीं है, तो उन्होने कहा है ना किचन से में घी लेकर आती हूँ और मौसी किचन से चुप चाप जाकर घी लेकर आई और फिर क्या था, मैंने उन्हे डॉगी बनाया और उनकी गांड को मसल मसल कर पूरा गरम कर दिया और उनके छेद मे घी लगाया और अपने लंड के मुहं पर घी लगा कर उनकी गांड के छेद पर रख कर जोरदार धक्का मारा और मौसी के करहाने की आवाज़ के साथ लंड अंदर चला गया और मैंने बीस मिनट तक ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाकर उनकी गांड मारी और गांड मे दूसरी बार वीर्य गिरा दिया था और अब में बहुत थक गया और उनके ऊपर ही लेट गया था। हम दोनों ने गावं में बहुत मजे किये और फिर हम वापस शहर आ गये थे। हमने घर आकर चुदाई कर बहुत मजे किये। अब हमे जब कभी भी चुदाई की याद आती है तो हम कभी भी शुरू हो जाते है। तो दोस्तों ये थी मेरी और मौसी की कहानी ।।

धन्यवाद …

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