भाभी की मतवाली गांड की सैर

प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, आप सभी बहुत अच्छी तरह से जानते और समझते भी है कि एक जवान औरत के साथ सेक्स करना उस औरत को चोदकर अपना बनाना और उसकी चुदाई के मज़े लेने हर एक जवान लड़के का सपना होता है और यही सपना मेरा भी था कि किसी मस्त, जवान औरत की गांड को मारी जाए और उसकी चूत में अपनी जीभ को डालकर उसका रस चखा जाए, उसके मज़े लिए जाए और अपने लंड की ताकत से उसकी चूत को चुदाई के असली मज़े दूँ। दोस्तों मुझे उस हर एक औरत की भरी-भरी कसी हुई उठान लिए ब्लाउज में दूध से भरे बूब्स हमेशा हिलते हुए मुझे अपनी तरफ आकर्षित करते और में उनको दबाने के सपनो में खो जाता कि कब में उसके ब्लाउज के बटन खोलकर उन बूब्स को आज़ाद करूँगा, ब्लाउज के हुक को खोलकर ब्रा को हटाकर में उन दोनों बूब्स को आजाद करके अपने हाथों में लेकर दबाऊंगा और कब उस औरत के नरम मुलायम बूब्स मेरे हाथों में आएँगे? और कब में भी उनके निप्पल को अपने मुहं में लेकर उनके रस का मज़ा लूँगा? दोस्तों में अपने मोहल्ले की हर जवान, गोरी, सुंदर और प्यारी भाभी के बारे में बस यही बातें सोचता था कि रात को यह कितना मज़ा देती होगी और लंड की सवारी करके हर रोज़ जन्नत घूमने जाती होगी। दोस्तों वैसे हर एक भाभी भी मुझसे बहुत घुलीमिली थी, कभी भी उनको कोई काम होता तो उनका यह देवर हमेशा उनके किसी भी काम को करने के लिए तैयार रहता था।

दोस्तों में आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपनी एक ऐसी अनोखी रोचक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ, जिसको पढ़कर आप लोगों को जरुर मज़ा आएगा, जिसमें मेरे सभी देखे हुए सपने मेरी भाभी ने पूरे किए और उन्होंने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और हमने मज़े किए। अब आगे पूरे विस्तार से सुनिए हमने ऐसा क्या क्या किया और कैसे मैंने अपनी भाभी के मज़े लिए? में उम्मीद करता हूँ कि यह आप लोगों को जरुर पसंद आएगी।

दोस्तों एक बार मेरे एक दूर के भैया हमारे यहाँ पर अपनी बहुत सुंदर सेक्सी बीवी के साथ कुछ दिनों के लिए रहने आए, जब मैंने अपनी भाभी को पहली बार देखा तो में उन पर लट्टू हो गया, क्योंकि वो तो बला की सेक्सी गोरी थी, मेरी नजर हर बार घूम फिरकर उनकी तरफ जाती और में उनके उभरे हुए बूब्स को देखकर अपनी आखें सेकने लगा। दोस्तों सच कहूँ तो मेरा उन पर दिल आ गया था, वो मेरे मन को भा गई थी। अब आगे सुनिए कि मेरे साथ क्या हुआ? यह बात उस रात की है और मुझे ज्यादा गरमी होने की वजह से नींद नहीं आ रही थी, हम ऐसे ही बाहर आँगन में निकलकर आ गये, सामने बेडरूम की खिड़की से हल्की ट्यूब लाईट की रोशनी बाहर आ रही थी, क्योंकि खिड़की के काँच पर कपड़ा पड़ा था, परंतु खिड़की का एक दरवाज़ा हल्का टेढ़ा खुला था ताकि साफ हवा कमरे में आ जा सके। तभी मैंने सोचा कि यह भैया क्या पढ़ रहे हैं? मैंने बस हल्के से दबे पैर पास जाकर खिड़की के नीचे से अंदर की तरफ देखा और वो सब कुछ देखकर तो मेरी सांस जैसे रुक ही गई। फिर मैंने देखा कि उस समय भाभी पूरी नंगी होकर पेट के बल लेटी हुई थी और उनकी मस्त सेक्सी गांड ऊपर की तरफ उठी हुई थी और भैया उनकी पीठ पर सरसों के तेल से मसाज कर रहे थे और वो साथ साथ उनके कूल्हों को भी मसाज कर रहे थे, जिसकी वजह से भाभी अपने मुहं से हल्के हल्के अहहह्ह् सस्स्सस्स अईईईईइ कर रही थी और जब भैया तेल लगाकर अपनी उंगली को भाभी के कूल्हे फैलाकर गांड में अंदर डालते तो भाभी कह उठती, अह्ह्ह्हह प्लीज ऊईईईईइ धीरे धीरे डालो बाबा मुझे बहुत दर्द होता है। फिर भैया अपनी लूँगी को पहने अपने दोनों हाथों से उनके ऊपर जाँघो पर बैठकर दोनों कूल्हों की मसाज कर रहे थे और मुझे गांड की मालिश से भाभी बहुत खुश नज़र आ रही थी। अब मैंने देखा कि भाभी के उल्टा होकर लेटने से भैया भी धीरे से उनके पास में लेटकर पीछे से उनकी गांड में अपनी जीभ को भी लगा रहे थे, जिससे भाभी आहह ऊह्ह्ह्हह्ह करती जाती। फिर पीछे से ही भैया ने भाभी के कूल्हों को फैला दिया, जिससे उनकी चूत भी दो फांको में बट गई और अब वो चूत के गुलाबी छेद में अपनी उंगली को डालकर धीरे से अंदर बाहर करने लगे, जिसकी वजह से भाभी को एक अजीब सा नशा चढ़ने लगा और वो अब धीरे धीरे मदहोश होने लगी थ। भैया धीरे से भाभी के कूल्हों के नीचे आ गये और उन्होंने अपनी जीभ से भाभी की चूत को लप लप करके चाटना शुरू किया, इससे भाभी की सिसकियाँ और साँसे और गरम और तेज़ हो गई थी। अब भाभी अपनी पीठ के बल लेट गई और भैया ने उनके आगे वाले हिस्से की मालिश करना शुरू कर दिया और भाभी के दोनों पैरों को फैलाकर वो उनकी गोरी चिकनी जांघो को रगड़ रगड़कर मालिश करने लगे और अपने अंगूठों से उनकी चूत के पास वाले दोनों हिस्सों की भी मसाज करने लगे। उसके बाद बहुत सारा थूक डालकर उनकी चूत पर लेप लगा दिया और फिर अपनी जीभ से चूत को अच्छी तरह से रगड़ रगड़कर लाल करके उसके गुलाबी छेद में अपनी जीभ को अंदर बाहर करके उंगली को बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर करके चूत को पूरा गीला करके चुदाई का विचार बनाया। अब भैया बार बार भाभी की चूत के ठीक बीच में ऊपर उगी हुई हल्की काली घुंघराली झांटो को भी अपने मुहं से होंठो में दबाकर नोचते जिससे भाभी को जोश का एक बहुत अजीब सा नशा छा जाता। दोस्तों उनकी झांटो के नीचे चूत की सुंदरता देखते ही बनती थी और वो बड़ा ही रोमांचक सुहावना द्रश्य था, जिसको देखकर मेरा लंड तनकर कुतुब मीनार सा टाईट खड़ा हो गया और अंडरवियर में मेरे लंड ने अपना पानी भी छोड़ दिया था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब मेरा लंड भी खड़ा होकर मेरे मन में भी अब भाभी को चोदने का विचार बन गया। फिर मैंने देखा कि भैया भाभी के सर की तरफ अपने दोनों पैरों को करके लेट गये हैं और भाभी की चूत में अपनी जीभ को डालकर वो खेल रहे हैं और भाभी भैया का 6 इंच लंबा और दो इंच मोटे लंड को पकड़कर अपनी जीभ से भैया के लंड का गुलाबी टोपा बड़े मज़े लेकर चाट रही थी और थोड़ी देर में भाभी ने भैया का लंड अपने मुहं में ले लिया और बड़ी मस्ती के साथ अंदर बाहर करने का मज़ा लेकर वो ऊह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह करके अपने एक हाथ से मज़बूती से लंड को पकड़कर पूरा खड़ा कर दिया और बहुत प्यार से अपनी व्याकुल नजरों से लंड को देखने लगी। अब भैया ने अपने लंड को भाभी की चूत को फैलाकर हल्का सा एक झटका देकर अंदर डाल दिया और लंड खप की आवाज़ के साथ नरम रेशम सी चिकनी चूत की मखमली गहराई में समा गया और वो पूरा अंदर चला। अब भैया ने भाभी को लगातार धक्के देकर जन्नत की सैर करवानी शुरू की और उनके हर एक धक्के पर भाभी पूरी तरह से हिल जाती और कुछ देर धक्कों का मज़े लेने के बाद भाभी ने उनको बोली कि अब तुम मेरी गांड भी तो मारो।

फिर इतना सुनते ही भैया ने भाभी की चूत से अपने लंड को तुरंत बाहर निकालकर उनको घोड़ी बनाकर गांड के छेद पर अपने लंड का टोपा लगाकर एक ज़ोर का धक्का देकर अपना लंड अंदर डाल दिया, लेकिन गांड की धुनाई करके भैया करीब तीन चार मिनट में ही झड़ गये और उनके लंड से निकलता गरम वीर्य का फव्वारा देखकर मेरा भी लंड अब भीग आया, लेकिन में क्या करता दबे पैर मुझे वापस अपने कमरे में आकर सोना पड़ा। दोस्तों वो रात मेरी बड़ी मुश्किल से कटी। अब मैंने भी भाभी की गांड मारने की सोची और मुझे कुछ दिन बाद वो मौका मिल ही गया। एक दिन में अचानक किसी काम से भाभी के बेडरूम में जा घुसा और तभी उस समय भाभी बाथरूम से नहाकर अपने भरे हुए गदराए बदन पर टावल लपेटकर बाहर निकली और में उनके नंगे गोरे पानी में भीगे हुए चिकने बदन को घूर घूरकर देखने लगा और वो मुझको देखकर तुरंत समझ तो गई कि इस लड़के को मेरी चूत चाहिए, लेकिन अब वो मुझसे मुस्कराकर बोली आज घर में कोई भी नहीं है, सभी लोग शादी में गए है कल तक हम दोनों इस पूरे घर में अकेले है और वो मुस्कुरा रही थी। उनकी शरारती हंसी को देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गई और अब मैंने उनसे कहा कि हाँ में सब कुछ पहले से ही जानता और अच्छे से समझता भी हूँ, लेकिन कुछ भी कहो भाभी आप बहुत सुंदर हो। फिर उन्होंने थोड़ा सा शरमाकर पूछा क्यों आज मेरी इतनी तारीफ क्यों हो रही है तुम्हारे इरादे तो नेक है ना? भाभी ने मुस्कराकर कहा। अब मैंने कहा कि वो भाभी आज आप मेरे दिल की तमन्ना पूरी कर दो। तभी उन्होंने मुझसे अपने नखराले सेक्सी अंदाज में पूछा क्यों क्या है तुम्हारी तमन्ना? उस समय भाभी के चेहरे पर एक कातिल हसीना वाली मुस्कुराहट थी। फिर मैंने बिना किसी संकोच के कह दिया कि मुझे आपकी गांड मारनी है, सच भाभी इतनी सुंदर, जवान, मदमस्त, भरी, फूली हुई साँचे में ढली गांड मैंने आज तक नहीं देखी, तुम्हारी गांड इतनी गठीली है कि में क्या कहूँ प्लीज आप मुझे गोरी गोरी गांड के दर्शन करवा दो, भाभी तुम्हारी सुंदरता की कसम में ज़िंदगी भर तुम्हारा गुलाम रहूँगा और यह बात कहकर में उनके टावल से लिपट गया और उनको अपनी बाहों में उठा लिया और भाभी को अपनी बाहों में भरकर गोद में उठाने से उनका टावल निकलकर ज़मीन पर आ गिरा और अब वो अपनी ब्रा और पेंटी मे आ गई थी। हल्की गुलाबी कलर की ब्रा और पेंटी में वो बहुत ही मादक लग रही थी।

अब वो मुस्करा उठी और मैंने भी जल्दी से उनके गुलाबी होंठो को अपने होंठो में क़ैद कर लिया और करीब तीन चार मिनट तक मैंने उनके होंठो को अपने होंठो में दबाए रखा। अब हमारी जीभ से जीभ लड़ रही थी और हमारे थूक का आदान प्रदान हो रहा था। में उनके होंठो को चूसता तो वो मेरे होंठो को सच पूछो तो उनके होंठ बहुत मीठे थे, बहुत गुलाबी रसभरे मुलायम और गुलाब की पंखुड़ी की तरह नाजुक थे। अब में उनको अपनी गोद में ऊपर उठाए हुआ था, जिसकी वजह से उनकी दोनों गोरी जांघे मेरी कमर के इधर उधर थी। अब मैंने उनको बिस्तर पर लाकर लेटा दिया और उनके पूरे गरम गोरे बदन की मसाज करने लगा। कुछ देर बाद भाभी की ब्रा को खोलकर उनके दोनों बड़े आकार के बूब्स को चूसने उनका रस निचोड़ने लगा और अपना पूरा दम लगाकर बूब्स को दबाने लगा और उनके निप्पल तो बहुत ही मीठे थे। में अब अपने अंगूठे की चुटकी बनाकर निप्पल की मालिश करने लगा और फिर सक करता रहा और दोनों बूब्स की बहुत अच्छी तरह से मसाज की, जिसकी वजह से उनके निप्पल टाईट होकर फूलकर आकार में बड़े हो गए और फिर उनकी गर्दन को अपनी जीभ से चाटा और उनकी एकदम गोल गहरी नाभि महककर बता रही थी कि वो कस्तूरी हिरण के समान थी।

अब भाभी बोली कि प्लीज अब थोड़ा जल्दी से मेरी पेंटी को उतारो और मेरी चूत को चाटकर चूत की खुजली को मिटा दो, मेरी आग को बुझा दो, में अंदर ही अंदर जल रही हूँ। फिर मैंने भी उनकी आज्ञा का पालन एक होनहार देवर की तरह किया और बिना समय गंवाये मैंने उनकी जलती हुई चूत को अपनी जीभ से सेवा देना शुरू कर दिया और वो अब सिसकियाँ लेने लगी, हाएए उफ्फ्फ्फ़ यार तुम कितना मज़ा देते हो आईईईईई आअह्ह्ह्ह ऊफ्फफ्फ्फ्। दोस्तों उनको अपनी चूत की खुजली और जलन को मेरी जीभ से शांत करवाने में बड़ा मज़ा मिल रहा था। मेरी जीभ भाभी की चूत में अंदर बाहर सांप की तरह आ जा रही थी और लप लपकर में उनकी चूत को गीला करके पूरी रफ़्तार से चूत को चाटने लगा। फिर थोड़ी देर बाद मैंने उनके कूल्हों को ऊपर किया और गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिससे मैंने उनकी गांड के ऊपर भी अपने प्यार का लेप लगाया। अब में चूत को अपने होंठो में दबाता और उसके बाद जीभ को बाहर करके गांड के काले छेद पर भी थूक लगाकर हल्के से जीभ से गांड को सहला देता, जिससे उनकी जवानी को एक करंट का झटका लगता। अब में अपने लंड को उनकी चुदाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार कर चुका था। मैंने भाभी से कहा कि आप अपने दोनों पैरों को फैला लो, ताकि लंड को आपकी गांड में लंड डालने में आसानी रहे। उन्होंने ठीक वैसा ही किया और मैंने ज़ोर लगाकर एक धक्का दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उनकी गांड के अंदर दाखिल हो गया और मैंने बड़ा मज़ा लेकर गांड मारी। फिर में नीचे सीधा लेट गया और भाभी सामने की तरफ मुहं करके मेरे लंड पर अपनी गांड को टिकाकर बैठ गई। मैंने उनकी गांड को एक बार फिर से चीरना शुरू किया और पीछे से हाथ बढ़ाकर दोनों बूब्स को दबाने भी लगा। में अब नीचे से गांड की धुनाई करता जाता और पीछे से दोनों बूब्स की मालिश करता, जिसकी वजह से उनको बड़ा आराम मिलता। फिर कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि गांड के अंदर बाहर करने से मेरे लंड को एक अलग ही सुख मिल रहा था और वो मज़ा सबसे अजीब था, जिसको में किसी भी शब्दों में नहीं लिख सकता और साथ ही मैंने कुछ देर बाद बूब्स को छोड़कर अपने एक हाथ की दो उंगलियों को सामने से चूत के गुलाबी छेद में अंदर डालकर चूत की चुदाई भी की, जिससे भाभी को दुगना मज़ा मिल सके और वो जन्नत की सैर का भरपूर आनंद ले सके। में लगातार अपने लंड को गांड में अंदर बाहर करता ठीक वैसे ही में अपनी ऊँगली को भी चूत में वैसे ही डालता और फिर थोड़ी ही देर बाद मैंने अपने लंड को उनकी गांड से बाहर खींच लिया और अपने हाथ में पकड़कर हिलाते हुए मैंने भाभी के बूब्स पर अपना ढेर सारा वीर्य निकाल दिया और उनके दोनों बूब्स पर मेरे लंड की मलाई फेल गई, वो अपने उस रूप में बहुत सेक्सी लग रही थी। अब में भाभी की गांड की सैर करके उनका गुलाम बन गया था और उन्होंने उठकर मेरे मुहं को अपने मुहं में लेकर उसको बहुत मेहनत करके दोबारा चमका दिया। उनको देखकर लगता था कि वो इस काम में बहुत अनुभवी है, शायद यह सब भैया के सिखाने का नतीजा था और उनको सभी काम बहुत अच्छी तरह से आते थे, यह बातें मुझसे भी धीरे धीरे समझ में आने लगी और दोस्तों में आज भी उनकी गांड मारने जाता हूँ, गांड मारने के साथ साथ मैंने उनकी चूत जो अब फटकर भोसड़ा बन चुकी है और उसके भी बहुत मज़े लिए। कुछ भी हो, लेकिन हम दोनों बहुत खुश थे और उनको लंड के मज़े और मुझे उनका पूरा सेक्सी बदन मिल गया था ।।

धन्यवाद …

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