aunty ne meri jid puri ki

प्रेषक : समीर …

हैल्लो दोस्तों, आप सभी को मेरा नस्कार। मैंने एक बार मेरी आंटी को गलती से पेंटी और ब्रा में देखा था। अब में रसोई में गया, जहाँ पर आंटी खाना पका रही थी। फिर में आंटी के पास गया और आंटी साड़ी में बहुत सेक्सी लग रही थी। अभी भी मुझे उनकी वो पेंटी की झलक याद आ रही थी, अब में उन्हें बस ताकता ही रह गया। फिर आंटी बोली जो कुछ हुआ वो भूल जाओ। फिर मैंने कहा कि आंटी में भूलने की ही कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन आपका वो सुंदर रूप मेरे मन से जाता ही नहीं है, आप बहुत ही सेक्सी हो ये बोलकर में थोड़ा सा रुका।

अब आंटी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले? ये देखकर मैंने और आगे बढ़ने की कोशिश की, तो मैंने कहा आंटी आप लाल पेंटी में बहुत ही सेक्सी लग रही थी, आपका शेप देखकर मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया। अब आंटी को गुस्सा आ रहा था। फिर वो पीछे मुड़ी और मेरी तरफ देखा,  अब मेरा लंड खड़ा ही था तो अब आंटी का ध्यान मेरे लंड की तरफ गया। अब आंटी के कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। फिर भी वो बोली देखो समीर तुम्हें ये सब भूलना होगा, ऐसे सोचो कि अपनी आंटी के बारे में कुछ मन में रखना ग़लत बात है। फिर अब में उनके नज़दीक गया और उनसे कहा और खुलकर बात करने लगा। फिर मैंने कहा कि आंटी आपको पता नहीं आप कितनी खूबसूरत हो, आपको कोई भी ग़लती से नंगा पेंटी में देख ले तो कोई भी आपको ज़बरदस्ती चोदने का प्रयास करेगा। फिर मैंने तो आपको नंगा ही नहीं बल्कि आपकी पेंटी के ऊपर हाथ से मसल भी दिया है, आपका शरीर कोमल और मुलायम है और जब मैंने आपको नंगा देखा था, तब आपकी उम्र किसी 22 साल की लड़की की तरह लग रही थी।

अब आंटी को गुस्सा भी आ रहा था और थोड़ा मन में अच्छा भी लग रहा था। अब उनकी तारीफ सुनकर आंटी ने कहा देखो हमारे बीच में ऐसा कोई भी रिश्ता नहीं बन सकता है, में एक शादीशुदा बच्चे वाली औरत हूँ और तुम्हें मेरे बारे में ऐसा नहीं सोचना चाहिए है, ऐसी सोच भी रखना बुरी बात है, तुम अपने मन से बुरी बातें निकाल दो। अब आंटी ने मुझे समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन में भी उनके उस नंगे रूप की काम वासना में डूब गया था। मुझे कुछ भी अच्छी बातें समझ नहीं आ रही थी, सिर्फ़ आंटी को चोदना ही मेरे मन में बैठ गया था। अब आंटी की बातों ने मुझे नाराज़ कर दिया था, लेकिन में भी सुनने को तैयार नहीं था।

फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी आप मुझे समझने की कोशिश करो, में तो आपसे एक साधारण ही संबंध रखता हूँ, में आपसे कोई भी आपके पति वाले संबंध नहीं बनाना चाहता, में तो सिर्फ़ आपको आपके उस नंगे रूप में निहारना चाहता हूँ। मुझे आपको आपकी मर्ज़ी के बिना चोदना नहीं है, अगर आपकी इच्छा हो तो ही हम अपने संबंध रखेगें। मैंने अभी भी आपको नंगा देखने के बाद भी अपने मन को काबू में रखा है, अगर आपको और कोई भी नंगा देखेगा तो आपको आपकी मर्ज़ी के बिना चोद डालेगा, आप बहुत खूबसूरत हो। अब आंटी ये सुनकर हैरान रह गयी कि में अब उनके बारे में ऐसे बातें कर रहा था, अब आंटी सोच में पड़ गयी थी और अब उनके कुछ समझ में नहीं आ रहा था। अब मुझे लग रहा था कि वो मेरी कुछ बातों को मानने के लिए राज़ी हो सकती है। तभी मैंने कहा कि आंटी में आपको सिर्फ़ नंगा ही देखना चाहता हूँ, में आपको पेंटी और ब्रा में फिर से देखना चाहता हूँ, में आपके शरीर को तब तक स्पर्श नहीं करूँगा, जब तक आपकी मर्ज़ी ना हो, में आपके सुंदर बूब्स और चूत चूतड़ देखना चाहता हूँ, बस में आपको दूर से देखकर अपने लंड को हाथ में लेकर मुठ मारूँगा।

अब आंटी ये सुनकर तो हैरान ही रह गयी कि में उनको नंगा देखना चाहता हूँ। फिर आंटी ने कहा कि देखो ये संभव नहीं है, मुझे तुमसे कोई भी ऐसा रिश्ता नहीं रखना और तुम ऐसा सोचना अब बंद कर दो, में किसी भी दूसरे मर्द के साथ अपनी इज़्जत शेयर नहीं करना चाहती हूँ। फिर मैंने आंटी से कहा कि आंटी आप मेरी बातें समझ नहीं रही हो। मैंने आपकी इज़्जत को तो कब का देख लिया है, आप ये भूल गयी है कि मैंने आपकी चूत और चूतड़ को भी सहलाया है और मैंने आपकी पेंटी में हाथ भी डाला है। अब आपकी मेरे सामने कोई और इज़्जत बची नहीं है, में आपको एक बात बताना चाहता हूँ कि में हमेशा से आपके बाथरूम में नहाने के बाद जो पेंटी होती थी, उससे मूठ मारता था। मैंने हमेशा अपने आप पर कंट्रोल रखा था, लेकिन आज के हादसे के बाद आपको नंगा देखने के बाद जो भी आपकी इज़्जत कपड़ो में ढकी थी, वो भी अब नहीं रही। अब आपकी इज़्जत बची ही नहीं, अब आप मेरे सामने नंगा भी घूमेंगी, तभी आपकी इज़्जत नहीं जायेगी।

आंटी आप मेरी सिर्फ़ मदद कीजिये और में सिर्फ़ आपकी उतनी ही इज़्जत माँग रहा हूँ, जो कि आज आपने गंवाई है। में आपको स्पर्श तक नहीं करूँगा, लेकिन में आपको सिर्फ़ पेंटी और ब्रा में ही देखना चाहता हूँ, में आपको पूरा नंगा भी नहीं होने को बोल रहा हूँ, सिर्फ़ मेरे मन में जो आग है उसे मिटाना चाहता हूँ और जो मेरे मन में आग लगी, इसके लिए भी आप ही जिम्मेदार हो। आपको मैंने नंगा नहीं देखा होता तो में आज आपसे ये बातें नहीं करता, आपने ही अपनी इज़्जत मुझे दिखाई है। फिर वो ग़लती से ही क्यों ना हो? अब आप मेरे सामने नंगी भी हो जाए तो भी आपको शरमाने की ज़रूरत नहीं है। मैंने आपके नंगे शरीर को पूरी तरह से देखा है। अब आंटी ये सब सुनकर परेशान हो गयी।

अब मेरी हद के सामने उनकी कुछ भी नहीं चल रही थी, अब उनको ये एहसास हो गया था कि अब उन्हें मेरे सामने फिर से एक बार नंगा होना ही पड़ेगा। फिर भी वो नंगा ना होने का प्रयास कर रही थी, तो आंटी ने कहा कि ये ग़लत है, हालाकिं मेरी इज़्जत चली गई है, तुमने मुझे नंगा देख लिया है, लेकिन में बार-बार तुम्हारे सामने नंगी नहीं हो सकती हूँ, एक बार नंगी देखने पर में बार-बार नंगी नहीं हो सकती हूँ, तुम यहाँ से जाओं और अब ये ख्याल छोड़ दो। अब आंटी के ये बोल सुनकर मेरी उम्मीदों पर पानी फिरने लगा था। अब मैंने फिर से प्रयास करना चाहा और मुझे भी मालूम था कि ये मेरा आखरी मौका था, क्योंकि मुझे भी पता था कि अब मैंने आंटी को नंगी नहीं किया तो में कभी भी उन्हें नंगा नहीं कर पाऊँगा। अब में ये मौका गँवाना नहीं चाहता था। फिर मैंने आंटी से कहा कि में आपके हाथ जोड़ता हूँ, आप मुझे इस मुसीबत से निकालो, अगर आपको नंगा देखकर मेरे मन की आग जो आपको चोदने की लगी है, वो में मुठ मार कर मिटाना चाहता हूँ। आज आप नंगी हो गयी तो में अपने मन की आग मिटाऊंगा और आपकी कोई इज़्जत भी नहीं जायेगी और मेरा मन भी शांत हो जायेगा, ऐसा बोलकर मैंने अपनी पेंट उतारी और अब में नंगा आंटी के सामने खड़ा हो गया। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब आंटी ये सब देखती ही रह गयी। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उनके सामने नंगा हो गया। अब मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था, अब आंटी भी मुझे पूरी तरह से निहारती रही, अब में अपने लंड को हाथ में पकड़कर उनके सामने सहलाने लगा। अब उन्हें मेरा लंड पसंद आ रहा था और वो भी उसे ध्यान से देख रही थी। फिर मैंने आंटी को कहा कि प्लीज़ आप मेरी सहायता कीजिए, अब आप अपने कपड़े उतार दीजिए, लेकिन आंटी ये मानने के लिए तैयार नहीं थी। फिर में बाथरूम में चला गया और आंटी ने नहाने के बाद जहाँ अपनी पेंटी सूखने के लिए डाली थी, वो लेकर आया और में उससे मूठ मारने लगा, वो पेंटी भी बदामी कलर की थी और मुलायम भी थी।

ये देखकर आंटी को भी समझ में आ रहा था कि में उनके प्रति बहुत पागल हो गया हूँ और अब में कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हूँ। फिर आंटी ने मुझसे कहा कि ये क्या कर रहे हो? रुक जाओं, तो  मैंने आंटी कि एक बात नहीं सुनी और मैंने उनकी वो पेंटी उनके सामने ही पहन ली और अपने लंड को पेंटी के ऊपर से सहलाने लगा। फिर मैंने उनको फिर से कहा कि में आपका नंगा शरीर देखना चाहता हूँ, में मेरी आग मिटाना चाहता हूँ। अब आंटी सोच में पड़ रही थी तो उन्होंने कहा कि में नंगी नहीं हो सकती, लेकिन में तुम्हें अपनी अभी पहनी हुई पेंटी उतार कर देती हूँ। अब में मन ही मन में खुश हो गया था। फिर आंटी ने अपनी पेंटी मेरे सामने ही उतार दी और आंटी ने मुझे अपनी पेंटी दे दी, तो मैंने उनकी पेंटी ले ली। अब उनकी पेंटी थोड़ी सी गीली भी हो गयी थी, अब उनके मन में भी सेक्स की वासना जाग गयी थी और पेंटी गीली हो गयी थी।

फिर मैंने उनकी पहनी हुई पेंटी निकाल दी और उनकी दी हुई पेंटी से में मेरा लंड सहलाने लगा, लेकिन  अब भी मेरे मन को शांति नहीं हो रही थी, तो मैंने आंटी से कहा कि प्लीज़ मेरे सामने आप फिर नंगी  हो जाओं तो मेरी आग मिट जायेंगी। अब आंटी भी मेरा लंड देखकर उनमें भी सेक्स की वासना जाग गयी थी तो आंटी ने कहा कि ठीक है, में मेरे कपड़े उतार देती हूँ। अब ये सुनकर मेरा लंड और भी खड़ा हो गया था तो आंटी ने मुझसे अपनी उतारी हुई पेंटी माँगी, तो मैंने उनकी पेंटी सूँघकर उन्हें दे दी।  फिर मेरे सामने ही आंटी ने अपनी पेंटी पहन ली और फिर आंटी ने अपने कपड़े उतारे। फिर उन्हें ब्रा और पेंटी में देखकर मैने उनके सामने ही जोर जोर से मुठ मारी। दोस्तों आज भी आंटी मेरे सामने नंगी होती है और में मुठ मारता हूँ। अब तो में बस आंटी को चोदने का इन्तजार का रहा हूँ ।।

धन्यवाद …

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