सरिता रंडी की गांड चोदी

सरिता रंडी की गांड चोदी

 

प्रेषक : राज …

हैल्लो दोस्तों, मेरी यह कहानी जिसको में आज आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ और यह मेरी एकदम सच्ची घटना है और यह घटना मेरे साथ सूरत में घटित हुई और अब में अपना परिचय देते हुए में अपनी आज की कहानी सुनाता हूँ। दोस्तों मेरा नाम राज है और में 21 साल का हूँ और मेरी लम्बाई 5.5 इंच है और मेरा लंड पांच इंच लंबा और तीन इंच मोटा भी है जो किसी की भी चूत को जमकर चोदकर उसको पूरी तरह से संतुष्ट जरुर कर सकता है। दोस्तों मेरे साथ कुछ दिनों पहले एक घटना घटी। मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त का एक लड़की के साथ कुछ समय पहले से चक्कर था और यह सभी बातें उसने ही मुझे एक दिन बताई और उसने उसकी गर्लफ्रेंड से मेरी बात भी करवाई और उसके बाद मैंने उसकी बहन जिसका नाम सरिता से भी बहुत देर तक बातें की, लेकिन वो उससे उम्र में बड़ी थी। दोस्तों अब में आप लोगों को उसके बारे में पूरी तरह विस्तार से बता देता हूँ। दोस्तों वो बहुत ही सुंदर है और उसके फिगर का आकार 32-28-33 है और वो बहुत ही सेक्सी है और उसको मुझसे बात करना बहुत अच्छा लगता था इसलिए वो मुझसे बहुत देर तक बातें किया करती थी और हम दोनों एक दूसरे से बहुत बार मिल भी चुके थे। में उसको देखकर बहुत खुश होता और उसके साथ बातें करके साथ में रहकर मुझे समय का पता ही नहीं चलता कि कब हमे इतनी देर हो गई, लेकिन उस वजह से हमारे बीच की दूरियां एकदम खत्म हो चुकी थी और हम बहुत हंस हंसकर बातें किया करते थे और बहुत खुश रहते थे।

दोस्तों एक अगस्त को मेरा जन्मदिन था और यह बात जब उसको पता चली तो उसने मुझसे पार्टी माँगी। फिर मैंने उससे कहा कि में तुम्हे अपने जन्मदिन की पार्टी एक अगस्त को नहीं पांच तारीख को दूँगा और वो मेरी बात को सुनकर बहुत खुश हो गई और अब में उसको अपने घर पर बुलाकर उसकी चुदाई करने के पूरे मूड में था और उनकी लम्बाई 5.7 इंच थी और उसके बूब्स एकदम सेक्सी बॉम्ब की तरह थे जिसको देखकर में अपने होश हमेशा पूरी तरह से खो बैठता था और फिर मैंने उस दिन उसको पार्टी के लिए घर पर आने के लिए मना लिया क्योंकि उस दिन मेरे घर के सभी लोग मेरे एक अंकल के घर शादी में गए हुए थे और उस दिन वो मेरे बताए समय से पहले ही आ गई। उस समय उसने काले रंग की टाइट शर्ट और जींस पहनी हुई थी और वो एकदम परी की तरह सुंदर लग रही थी जिसको देखकर में बहुत खुश था। उसके बाद मैंने उसको मेरे साथ बैठकर ड्रिंक पीने को कहा, लेकिन उसने पहले मुझसे मना किया, लेकिन मेरे समझाने पर उसने पूरे तीन पेग पी लिए जिससे वो अपने होश पूरी तरह से खो बैठी और अब उसको नशे में देखकर मेरे अंदर और भी ज्यादा हिम्मत आ गई। पहले तो में थोड़ा सा घबराया, लेकिन बाद में मैंने हिम्मत करके उसको बिस्तर पर लेटा दिया और में उसके बूब्स को दबाने लगा और वो सिसकियाँ भरने लगी थी। फिर उसके बाद में उसके होंठो को चूमने चूसने लगा था और फिर वो मुझे अपनी तरफ से पूरी तरह से मेरा साथ देने लगी थी क्योंकि वो अब अपने होश में नहीं थी। फिर उसके बाद मैंने उसके सारे कपड़े उतारकर उसको एकदम नंगा कर दिया। अब में उसको अपने सामने पूरा नंगा देखकर उसका गोरा, कामुक बदन अपने आप को रोक नहीं पा रहा था और में अपनी चकित नजरों से उसको देख रहा था। तभी मेरा एक हाथ उसकी जाँघ पर चला था और वो एक हाथ से मेरी छाती के बालों से खेल रही थी। फिर तब मैंने ध्यान से देख कि अब धीरे धीरे उसका चेहरा लाल होने लगा था और मेरे हाथों का दबाव भी अब बढ़ चुका था और में उस समय पूरे जोश में था और अब में उसके बूब्स के साथ खेलने लगा था। उसके बाद हम दोनों एक लंबे गहरे फ्रेंच किस में खो चुके थे और मेरा हाथ उसके पूरे बदन पर घूम रहा था और सरिता मेरी पेंट की चेन को खोलकर मेरे लंड से खेल रही थी और मैंने उसके दोनों बूब्स को ज़ोर से दबाना, चूसना और उनका रस निचोड़ना शुरू कर दिया। फिर वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी और तभी उसने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली कुछ देर बाद उसने मेरी टी-शर्ट को उतार दिया और वो अब मेरी पेंट के हुक को खोल रही थी और कुछ देर बाद हम दोनों एकदम नंगे हो चुके थे। वो पूरी नंगी होने के बाद काम की देवी लग रही थी और तभी सरिता थोड़ा सा घूम गई और उसने तुरंत मेरे लंड को अपने मुहं में ले लिया और वो मेरा लंड पागलों की तरह चूसने लगी और अपने मुहं से अंदर बाहर करने लगी और अपनी जीभ को टोपे पर ऐसे घुमा रही थी जैसे वो कोई लोलीपॉप चूसकर उसके मज़े ले रही हो।

फिर मैंने भी अब उसकी चूत को चूसना और अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो आहें भरने लगी थी और थोड़ी ही देर में हम दोनों एकदम लाल हो गये और हम दोनों ने एक दूसरे के मुहं में अपना प्रेम रस छोड़ दिया। फिर सरिता ने करीब दो मिनट तक मेरा लंड और लगातार चूसा, जिसकी वजह से मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा हो गया और तब तक में भी सरिता की चूत को अपनी जीभ से चाट चाटकर साफ कर चुका था। अब मैंने सरिता को डॉगी स्टाइल में होने के लिए बोला और उसको बोला कि सरिता आज में तुम्हारी चुदाई करके वर्जिनिटी को खत्म करूँगा और वो मेरी बात को सुनकर गहरी सोच में पड़ गयी, क्योंकि उसको मेरी बात का मतलब समझ में नहीं आया था, क्योंकि यह सेक्स उसका पहला सेक्स था। फिर मैंने अपने तनकर खड़े लंड का टोपा उसकी गांड के छेद पर रख दिया और तब मैंने देखा कि उसके चेहरे पर मुझे खुशी और डर के एक साथ साथ मिले-जुले भाव दिखाई दिए, लेकिन वो मुझसे सिर्फ़ इतना ही बोल सकी कि प्लीज़ तुम धीरे धीरे करना। अब मैंने उसको उस बात की तरफ से बिल्कुल चिंता ना करने के लिए कहा और अब अपने लंड का दबाव में उसकी गांड पर बढ़ाने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि उसकी गांड बड़ी ही मुलायम, लेकिन टाइट भी थी और मेरे लंड का आधा टोपा उसकी गांड में जाकर अटक गया। अब मैंने अपने लंड को एक बार फिर से ज़ोर लगाकर अंदर दबा दिया तो मेरा टोपा अब पूरा अंदर चला गया, लेकिन सरिता के मुहं से दर्द की वजह से बहुत ज़ोर से चीख निकल पड़ी और उसकी नज़र अब भी उस कांच की खिड़की की तरफ थी, लेकिन में जानबूझ कर उधर नहीं देख रहा था। अब मैंने सरिता से पूछा कि क्या तुम्हे दर्द ज़्यादा हो रहा है? तो वो बोली कि हाँ दर्द तो बहुत तेज़ हो रहा है, लेकिन आज आपको संतुष्ट करना मेरा एक फ़र्ज़ है, क्योंकि में आपको बहुत प्यार करती हूँ और इसलिए में यह सब जरुर करूँगी। फिर मैंने उनके मुहं से वो बात सुनकर अपने लंड को उसकी गांड से बाहर निकाला और इस बार फिर ज़ोर से डाल किया तो सरिता अपने होठों को अपने दांतों से काटती हुई ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी और उसकी आँखों से आँसू भी बाहर आने लगे थे, तो उसका दर्द देखकर मैंने उससे कहा कि सरिता अगर तुम्हे ज्यादा दर्द तकलीफ़ हो रही है तो में अपने लंड को बाहर निकालकर तुम्हारी चूत में डाल देता हूँ? तो वो बोली कि नहीं सब कुछ ठीक है आप गांड में ही डालकर लगातार करते रहो, शायद आपको थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा और अगर नहीं मिला तो आप वापस बाहर निकालकर मेरी चूत में डाल देना।

अब मैंने अपना लंड हल्के हल्के दबाना शुरू कर दिया तो उसकी हालत अब पहले से भी ज्यादा खराब होने लगी और वो बेड पर गिर गयी, मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने देखा कि मेरे लंड पर जगह जगह खून लगा हुआ था। फिर में अपने लंड को उसकी चूत में डालने लगा तो उसने मुझसे मना कर दिया और मैंने अपनी ऊँगली को अपने मुहं में डालकर चिकना किया और अपने लंड पर लगाकर फिर से उसकी गांड में डाल दिया। इस बार उसको बहुत तेज कम दर्द हुआ और मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस गया फिर मैंने धीरे धीरे धक्के तेज़ किए जिसकी वजह से मेरा लंड थोड़ा सा और अंदर जाने लगा। दोस्तों उसकी गांड ज़्यादा टाइट होने और उसको ज़्यादा दर्द होने की वजह से शायद उसको इतना मज़ा नहीं आ रहा था इसलिए मैंने उसकी चूत में अपना अंगूठा डाल दिया और धक्के देने लगा और में उसकी गांड में अपने लंड को चलाने लगा। फिर वो अब गरम होने लगी और मोन करने लगी। फिर थोड़ी ही देर में उसकी गांड मुझे बहुत गीली गीली लगने लगी और वो अपनी गांड को भींचने लगी। में समझ गया कि उसकी गांड के अंदर से जोश बाहर निकल रहा है और अब मेरा लंड आराम से अंदर बाहर हो रहा था। मेरा लंड अभी भी शांत नहीं हुआ था इसलिए मैंने उसकी चूत में अंगूठा और गांड में अपने लंड को डालकर धक्के देने चालू रखे और करीब दो मिनट के बाद ही मेरे लंड ने अपना वीर्य उसकी गांड में छोड़ दिया और मैंने देखा कि सरिता ने मेरा अंगूठा अपनी चूत के होंठो में बुरी तरह से दबाकर उसका हिलना रोक दिया है और में सरिता के ऊपर ही ढेर हो गया। मेरा लंड अब भी उसकी गांड में था और तभी सरिता घूमी और मैंने देखा कि उस समय उसके चेहरे पर एक ज़बरदस्त खुशी और मुस्कुराहट थी और उसने मुझे अपनी बाहों में ज़ोर से भींच लिया और उसने मेरे होंठो को चूम लिया ।।

धन्यवाद …

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